1500 टेस्ट, 4 फेल! भोपाल नगर निगम के जल दावों पर बड़ा सवाल.
E. coli detection raises serious concerns over drinking water safety in Bhopal.
1500 Tests, 4 Failures! Big Questions Raised Over Bhopal Municipal Corporation’s Water Quality Claims.
Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद, भोपाल। देश की स्मार्ट सिटी कहलाने वाला भोपाल एक बार फिर पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में है। नगर निगम द्वारा की गई 1500 से अधिक स्थानों पर पानी की सैंपलिंग में चार स्थानों पर ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि ने शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था की पोल खोल दी है। यह वही ई-कोलाई है, जिसकी मौजूदगी सीधे तौर पर सीवेज और गंदगी की मिलावट की ओर इशारा करती है।
नगर निगम भले ही इसे “एहतियाती जांच” बता रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि ई-कोलाई का मिलना कोई मामूली तकनीकी खामी नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर विफलता है। नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने सफाई दी कि घबराने की जरूरत नहीं है और प्रभावित इलाकों की सप्लाई लाइन तुरंत बदल दी गई है। सवाल यह है कि अगर जांच नहीं होती, तो क्या भोपालवासी यूं ही जहर मिला पानी पीते रहते?
जांच के दौरान खानूगांव और आदमपुर जैसे इलाकों में पाइपलाइन ब्रेक और वैकल्पिक व्यवस्था की खामियां सामने आईं। खानूगांव में टूटी लाइन से पानी सप्लाई हो रहा था, जबकि आदमपुर में हालात इतने संवेदनशील पाए गए कि निगम को टैंकरों से पानी पहुंचाना पड़ा। यह स्थिति साफ बताती है कि नियमित मॉनिटरिंग का दावा केवल फाइलों तक सीमित है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, ई-कोलाई युक्त पानी से पेट दर्द, उल्टी, दस्त और खूनी दस्त जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, जो बच्चों और बुजुर्गों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। इसके बावजूद नगर निगम की सलाह है कि नल खुलने के पहले 10 मिनट का पानी न पिएं—यानी समस्या मान ली गई, समाधान आधा-अधूरा!
अब सवाल जनता पूछ रही है—
क्या नगर निगम सिर्फ सैंपलिंग कर जिम्मेदारी से बच जाएगा?
या भोपाल की पूरी जल आपूर्ति व्यवस्था की गहन ऑडिट होगी?
फिलहाल निगम ने लीकेज की सूचना 181 पर देने की अपील की है, लेकिन भरोसा तब बनेगा जब भोपाल को सच में ई-कोलाई मुक्त पानी मिलेगा, न कि केवल आश्वासन।
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