श्रद्धा, सेवा और साधना का संगम! भंते सागर थेरो का 25वां वर्षावास समारोह.
A Confluence of Devotion, Service, and Meditation! Bhante Sagar Thero’s 25th Vassavasa Ceremony.
Sitaram Kushwaha, Special Correspondent, Vidisha, MP Samwad.
Bhante Shakyaputra Sagar Thero began his 25th Vassavasa (monastic retreat) at Buddhabhumi Mahavihara, Bhopal, marking a spiritual journey of dedication and self-discipline. The event featured Dhamma teachings, meditation, and community service, reflecting the essence of Buddhist tradition through compassion, introspection, and collective devotion.
MP संवाद, भोपाल। आषाढ़ी पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुद्धभूमि महाविहार मॉनेस्ट्री, चुनाभट्टी, भोपाल में आयोजित वर्षावास प्रारंभ समारोह आध्यात्मिक श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर वरिष्ठ बौद्ध गुरु भंते शाक्यपुत्र सागर थेरो ने अपने 25वें वर्षावास का अधिष्ठान विधिपूर्वक संपन्न किया।
धम्म परंपरा के अनुसार, भंते के साथ उनके शिष्य भंते राहुलपुञ और श्रामणेर संघपुत्र ने भी संघ के साथ वर्षावास संकल्प लेकर इस तपश्चर्या परंपरा को आगे बढ़ाया। कार्यक्रम की शुरुआत बुद्ध वंदना, त्रिशरण और पंचशील से हुई। इसके पश्चात धम्मचक्र प्रवर्तन सुत्त का पाठ, वर्षावास संकल्प विधि, धम्मदेशना, और सामूहिक ध्यान साधना आयोजित की गई।
भंते शाक्यपुत्र सागर थेरो का संबोधन:
भंते ने कहा,
“वर्षावास केवल परंपरा नहीं, यह आत्मानुशासन और साधना का पर्व है। यह कालखंड भिक्षुओं के लिए आत्म-शुद्धि और समाज को धम्म प्रकाश देने का संकल्प है। मेरा यह 25वां वर्षावास कोई उपलब्धि नहीं, बल्कि सेवा और विनम्रता की नई शुरुआत है।”
वर्षावास: बौद्ध परंपरा का आत्मशुद्धि पर्व
वर्षावास वह बौद्ध परंपरा है जिसमें भिक्षु वर्षा ऋतु में तीन माह एक ही स्थान पर ठहरकर ध्यान, साधना और समाज सेवा करते हैं। इसकी स्थापना स्वयं भगवान बुद्ध ने की थी, जिससे समाज में संवेदनशीलता, अनुशासन और पर्यावरणीय संतुलन का संदेश जाए।
समाज सेवा के कार्य भी संपन्न
इस अवसर पर:
- आयुष्मान रामनरेश कुशवाह (मुरैना) को आजीवन श्रामणेर भिक्षु दीक्षा दी गई।
- रोटरी क्लब ऑफ भोपाल कैपिटल द्वारा वंचितों को राशन वितरण किया गया।
- मैत्रेय बुद्ध महाविहार उपासिका संघ एवं बुद्धभूमि महाविहार उपासक संघ के 105 परिवारों ने सामूहिक भिक्षु दान किया।
उपस्थित श्रद्धालु:
वंदना मुलताइकर, चंद्रप्रकाश गोलाइट, रामप्रसाद सिलोरिया, सुशीला गजभिये, सुनीता शेजवाल, वैशाली मनोहर सहित सैकड़ों अनुयायी उपस्थित रहे।