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बेतवा नदी सूखने की कगार पर! विदिशा को जल संकट का खतरा.

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विदिशा की बेतवा नदी जल संकट की ओर बढ़ रही है। प्रशासन की लापरवाही और जलवायु परिवर्तन ने इस ऐतिहासिक नदी को सूखने की कगार पर ला दिया है।

विदिशा में बेतवा नदी का सूखता हुआ किनारा, जल संकट का संकेत

बेतवा नदी का जलस्तर तेजी से गिरा, विदिशा को भारी जल संकट का खतरा।

Betwa River on the Verge of Drying Up! Water Crisis Threatens Vidisha.

Special Correspondent, Bhopal, MP Samwad.

विदिशा (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है, लेकिन प्रदेश की जीवनदायिनी नदियों पर मंडरा रहे संकट को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता। विदिशा की पहचान और यहां की जलसंजीवनी कही जाने वाली बेतवा नदी (Betwa River) अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। गर्मी के मौसम ने अभी पूरी तरह दस्तक भी नहीं दी है, और बेतवा नदी सूखने के कगार पर पहुंच गई है।

बेतवा नदी पर मंडराया संकट

बेतवा नदी न केवल विदिशा बल्कि पूरे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के लिए भी एक महत्वपूर्ण जल स्रोत रही है। यह मालवा के पठार से निकलकर कई जिलों को सींचते हुए यमुना नदी में समाहित होती है। जल संरक्षण की अनदेखी और बढ़ते अतिक्रमण ने इसे सूखने की कगार पर ला खड़ा किया है।
बेतवा नदी के सूखने का असर किसानों, आम लोगों और जल पर निर्भर जीव-जन्तुओं पर साफ दिखने लगा है। इस जल संकट से न केवल सिंचाई पर प्रभाव पड़ेगा, बल्कि भूजल स्तर भी तेजी से नीचे चला जाएगा, जिससे पीने के पानी की समस्या विकराल रूप ले सकती है।

बेतवा की दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेदार?

बेतवा के मौजूदा हालात के लिए केवल जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराना गलत होगा। इसमें इंसानी लापरवाही और प्रशासन की उदासीनता भी उतनी ही दोषी है।

  1. बेतवा जल का अत्यधिक दोहन: अनियंत्रित जल दोहन और जल संरक्षण की उपेक्षा ने नदी को सूखने के कगार पर ला दिया है।
  2. अतिक्रमण और अवैध निर्माण: जलग्रहण क्षेत्र में अतिक्रमण और अवैध निर्माण के कारण जल संचयन की प्राकृतिक संरचनाएं नष्ट हो रही हैं।
  3. जलवायु परिवर्तन और घटती बारिश: असंतुलित मानसूनी बारिश के कारण नदी के जल स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

विदिशा को झेलना पड़ेगा जल संकट!

अगर जल्द ही समाधान नहीं निकाला गया तो विदिशा और उसके आसपास के इलाकों को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। किसानों को खेती के लिए पानी नहीं मिलेगा, जिससे फसलों पर गंभीर असर पड़ेगा। आम नागरिकों को पीने के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा और भूजल स्तर इतना गिर जाएगा कि हैंडपंप और कुएं भी सूखने लगेंगे।

कैसे बच सकती है बेतवा नदी?

बेतवा नदी को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार और आम जनता दोनों को मिलकर प्रयास करने होंगे।
नदी के किनारे घने वृक्षारोपण किया जाए ताकि जल वाष्पीकरण को रोका जा सके और पानी की उपलब्धता बनी रहे।
वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा दिया जाए ताकि बारिश के पानी को संचित कर भूजल स्तर को ऊपर लाया जा सके।
अतिक्रमण हटाया जाए जिससे नदी अपने प्राकृतिक रूप में बह सके।
बेतवा का गहरीकरण और चौड़ीकरण किया जाए ताकि नदी में पूरे वर्ष जल प्रवाह बना रहे।

सरकार को उठाने होंगे ठोस कदम

बेतवा नदी को बचाने के लिए सरकार को गंभीर प्रयास करने होंगे। प्रशासन को चाहिए कि वह अतिक्रमण को हटाकर नदी को प्राकृतिक रूप से बहने दे और जल संरक्षण को लेकर कड़े कानून बनाए। बेतवा सिर्फ एक नदी नहीं बल्कि विदिशा और मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर है। यदि इसे संरक्षित नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को केवल इसकी इतिहास में ही जानकारी मिलेगी।

निष्कर्ष

जल संकट की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बेतवा नदी के पुनर्जीवन के लिए त्वरित कार्यवाही आवश्यक है। यदि सरकार और आम जनता मिलकर जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाएं, तो बेतवा को बचाया जा सकता है। अब यह फैसला प्रशासन और समाज दोनों को लेना है कि क्या वे बेतवा को सूखने देंगे या इसे पुनर्जीवित करने के लिए आगे आएंगे।

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