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48 घंटे, दो मौतें! बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की सुरक्षा पर बड़ा सवाल.

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Dead tiger found in well inside Bandhavgarh Tiger Reserve Umaria raising forest security concerns

48 घंटे में दो बाघों की मौत ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

Two deaths in 48 hours! Serious questions raised over the security of Bandhavgarh Tiger Reserve.

Special Correspondent, Amit Singh, Umaria, MP Samwad News.

MP संवाद, उमरिया जिले के विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य में एक बार फिर बाघ की मौत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभयारण्य के भीतर स्थित एक पुराने कुएं में वयस्क बाघ का शव मिलने से हड़कंप मच गया। चिंताजनक तथ्य यह है कि यह घटना पिछले दो दिनों में दूसरी बाघ मृत्यु की है।

इससे पहले बुधवार को कथली बीट क्षेत्र में एक मादा बाघ शावक का शव बरामद हुआ था, जिसे किसी जंगली जानवर से संघर्ष के बाद मौत का मामला बताया गया। अब गुरुवार शाम धमोखर रेंज के रायपुर क्षेत्र अंतर्गत कुदरी टोला गांव के पास स्थित एक पुराने कुएं में वयस्क बाघ का शव मिलना कई आशंकाओं को जन्म दे रहा है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सूचना मिलने के बाद अभयारण्य प्रशासन और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि शुक्रवार सुबह बाघ के शव को कुएं से बाहर निकाला गया। बाघ की मौत के कारणों और उसकी उम्र का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा।

स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कुएं से पिछले कई दिनों से तेज दुर्गंध आ रही थी, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि बाघ की मौत 5 से 6 दिन पहले हो चुकी थी। सवाल यह है कि इतने दिनों तक अभयारण्य के भीतर इतनी बड़ी घटना पर वन विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ी?

धमोखर रेंज के रेंजर ध्रुव सिंह ने बताया कि घटनास्थल वन चौकी से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर है। बावजूद इसके बाघ का शव कई दिनों तक कुएं में पड़ा रहा। अब श्वान दस्ते की मदद से आसपास सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

लगातार हो रही बाघ मौतें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या बांधवगढ़ का सुरक्षा तंत्र सिर्फ कागजों में मजबूत है?
या फिर जमीनी हकीकत में निगरानी व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है?

वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षण से जुड़े संगठनों ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, ताकि सच सामने आ सके और बाघों की सुरक्षा केवल आंकड़ों तक सीमित न रह जाए।

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