विस्थापन मुआवजा या भ्रष्टाचार का धंधा? बालाघाट वन विभाग बेनकाब.
Displacement compensation or a business of corruption? Balaghat Forest Department exposed.
Anand Tamrakar, Special Correspondent, Balaghat, MP Samwad.
Balaghat’s Lalbarra Forest Guard Matan Nagpure was caught red-handed by EOW Jabalpur while accepting ₹50,000 bribe in a displacement compensation case. He had demanded ₹3.5 lakh from villagers entitled to ₹75 lakh. The incident exposes corruption in forest compensation, raising serious questions on governance and accountability in Madhya Pradesh.
MP संवाद, बालाघाट जिले के लालबर्रा वन परिक्षेत्र में पदस्थ वनरक्षक मतन नगपूरे को जबलपुर की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की टीम ने रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा। वनरक्षक को मौके पर ही गिरफ्तार कर हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है।
3.5 लाख की मांग, 50 हजार पर धराया
सूत्रों के मुताबिक, नवेगांव ग्राम निवासी राजेन्द्र को विस्थापन के एवज में 75 लाख रुपये का मुआवजा मिलना था। इसी राशि के भुगतान के बदले वनरक्षक नगपूरे ने 3.5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत दर्ज होने के बाद EOW ने जाल बिछाया और कार्यालय में 50 हजार रुपये की पहली किस्त लेते ही उसे दबोच लिया।
गांवों के विस्थापन में भ्रष्टाचार की गंध
यह मामला सोनेवानी रिज़र्व फॉरेस्ट से जुड़ा है, जहां तीन गांवों का विस्थापन होना है। इन गांवों के निवासियों को मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इसी सिलसिले में वनरक्षक ने लाभार्थियों से पैसे ऐंठने की कोशिश की।
प्रशासन और विभाग पर सवाल
वन विभाग में इस घूसकांड ने एक बार फिर भ्रष्टाचार के गहरे जाल को उजागर कर दिया है। सवाल यह है कि क्या गरीब ग्रामीणों के हक की रकम भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ेगी?