खामोशी से बढ़ता संकट! एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पर वैज्ञानिकों की सख्त चेतावनी.
A Silent Growing Threat! Scientists Issue Stern Warning on Antibiotic Resistance.
Manish Trivedi, Digital Correspondent, Bhopal, MP Samwad.
By 2050, antibiotic resistance could drastically increase treatment costs from $66 billion to $159 billion annually. The rise of drug-resistant superbugs threatens 38.5 million lives, especially in low-income countries. The study urges governments to act fast by promoting drug research, improving access, and ensuring the responsible use of antibiotics.
MP संवाद, एक नई स्टडी ने चेतावनी दी है कि एंटीबायोटिक दवाओं की प्रभावशीलता में गिरावट (एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस) के चलते मौतों की संख्या और इलाज की लागत में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट द्वारा प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, यदि मौजूदा रुझान जारी रहे, तो इलाज की वैश्विक लागत वर्तमान 66 अरब डॉलर (लगभग ₹5.5 लाख करोड़) से बढ़कर 2050 तक 159 अरब डॉलर (करीब ₹13.3 लाख करोड़) तक पहुंच सकती है।
क्या है एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस और खतरा कहां है?
जब हम एंटीबायोटिक दवाओं का अत्यधिक या गलत उपयोग करते हैं, तो बैक्टीरिया उनके खिलाफ प्रतिरोधी बन जाते हैं। इन्हें सुपरबग्स कहा जाता है, जो आम दवाओं को बेअसर बना देते हैं। इससे संक्रमण का इलाज कठिन हो जाता है, अस्पताल में भर्ती होने की दर और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं।
कम आय वाले देशों को होगा बड़ा नुकसान
शोध के मुताबिक, यह संकट विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों में ज्यादा गंभीर होगा। यहां संसाधनों की कमी के कारण इलाज और बचाव मुश्किल हो सकता है।
आईएचएमई (IHME) के डेटा का उपयोग करते हुए यह अनुमान लगाया गया है कि 2050 तक एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस से होने वाली मौतों में 60% की वृद्धि हो सकती है, और 2025 से 2050 के बीच 3.85 करोड़ लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं।
क्या है समाधान?
स्टडी का नेतृत्व कर रहे पॉलिसी फेलो एंथनी मैकडॉनेल और उनकी टीम ने सुझाव दिया कि:
- नई और प्रभावी दवाओं के अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाए,
- एंटीबायोटिक का सही और सीमित उपयोग सुनिश्चित हो,
- और सभी को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ कराई जाएं।
शोध का निष्कर्ष स्पष्ट है:
अगर एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस से होने वाली मौतें रोकी जाएं, तो 2050 तक विश्व की जनसंख्या में 2.22 करोड़ लोगों की जान बचाई जा सकती है।
यह चेतावनी सरकारों और स्वास्थ्य संगठनों के लिए एक तात्कालिक कार्रवाई का आह्वान है।