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लोकसभा से पंचायत तक वंशवाद का कब्ज़ा, ADR रिपोर्ट में खुलासा.

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ADR report reveals dynastic politics from Lok Sabha to Panchayats in India - mpsamwad.com

From Lok Sabha to Panchayats, Dynastic Politics Dominates, Reveals ADR Report.

Harishankar Parashar, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.

The ADR report exposes how dynastic politics continues to dominate India’s political landscape, from Lok Sabha to Panchayats. Political families hold strong influence, limiting opportunities for fresh leadership and democracy at the grassroots level. The findings highlight how nepotism has captured power structures across levels of governance in Madhya Pradesh and beyond.

MP संवाद, भोपाल, 17 सितंबर 2025। भारतीय लोकतंत्र पर परिवारवाद का शिकंजा कसता जा रहा है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट कहती है कि देश के 5,204 सांसदों और विधायकों में से 1,107 (21%) जनप्रतिनिधि राजनीतिक परिवारों से आते हैं। लोकसभा में यह आंकड़ा 31% और विधानसभाओं में 20% तक पहुंच चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि महिलाओं में यह अनुपात 47% है—सशक्तिकरण से ज्यादा परिवारवाद की देन।


मध्यप्रदेश: बीजेपी-कांग्रेस दोनों ‘परिवार क्लब’ के सदस्य

मध्यप्रदेश में 230 विधायकों में से 48 (21%) परिवारवाद से जुड़े हैं।

  • भाजपा: 28 विधायक
  • कांग्रेस: 20 विधायक
    सिंधिया परिवार, दिग्विजय-जयवर्धन सिंह, अर्जुन-अजय सिंह, बाबूलाल-क्र‍िष्णा गौर और सुंदरलाल-सुरेंद्र पटवा—यह उदाहरण बताते हैं कि सत्ता की कुर्सियां अब परिवारों की बपौती बन चुकी हैं।

यूपी-महाराष्ट्र: लोकतंत्र या खानदानी कारोबार?

उत्तर प्रदेश में 30% से ज्यादा विधायक वंशवादी हैं। समाजवादी पार्टी ने यादव परिवार के 5 सदस्यों को टिकट दिया। कांग्रेस और बीजेपी भी पीछे नहीं।
महाराष्ट्र में तो हाल और भी खराब हैं। यहां 25% विधायक-सांसद परिवारवाद से आते हैं, और विधानसभा चुनाव 2024 में 80% से ज्यादा सीटों पर वंशवादी उम्मीदवार उतरे। पवार, ठाकरे, फड़णवीस—सत्ता अब परिवारों के हाथों की कठपुतली बन गई है।


दक्षिण भारत: पंचायतों तक फैला वंशवाद

कर्नाटक में जेडी(एस) के 66% उम्मीदवार वंशवादी। केरल और तमिलनाडु में 20–30% विधायक इसी श्रेणी में आते हैं। बेंगलुरु ग्रामीण की पंचायतों से लेकर त्रिवेंद्रम नगर निगम तक, परिवारवाद की पकड़ लोकतंत्र को खोखला कर रही है।

एडीआर की चेतावनी: लोकतंत्र बन रहा ‘कुलीनतंत्र’

रिपोर्ट साफ कहती है कि परिवारवाद लोकतंत्र को ‘ओलिगार्की’ यानी कुलीनतंत्र में बदल रहा है।

  • हार्वर्ड के शोध बताते हैं: वंशवाद आर्थिक विकास को रोकता है।
  • विशेषज्ञ मानते हैं: इससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ी, लेकिन नए नेतृत्व की राह बंद हो गई।

बड़ा सवाल: लोकतंत्र किसका? जनता का या परिवारों का?

क्या भारत का लोकतंत्र सबके लिए है या सिर्फ राजनीतिक परिवारों का किला? जवाब जनता को ढूंढना होगा।

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