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अस्पताल से गुम हुई जिंदगी! सरकार की पोषण योजनाओं पर सवाल.

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ग्वालियर अस्पताल से लापता अति कुपोषित बच्ची और उसकी मां – mpsamwad.com

Life Lost from Hospital! Questions Raised on Government’s Nutrition Schemes.

Special Correspondent, Gwalior, MP Samwad.

A severely malnourished girl and her mother mysteriously disappeared from Gwalior’s Kamla Raja Hospital. The incident exposes the serious failure of health and nutrition schemes in Madhya Pradesh. Despite government campaigns, the system failed to protect the most vulnerable, raising alarming questions about accountability and actual ground-level implementation.

MP संवाद, ग्वालियर। कमला राजा अस्पताल में भर्ती अति कुपोषित बच्ची और उसकी मां अस्पताल से अचानक गायब हो गईं। यह मामला स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कोई भी अधिकारी इस पर बोलने को तैयार नहीं है।

ग्वालियर जिले के भितरवार ब्लॉक के हरसी गांव की निवासी प्रियंका, उम्र 2 साल 2 महीने, मात्र 4.3 किलो वजन और 7 सेमी बाह की माप के साथ एसडी-4 (Severe Acute Malnutrition) श्रेणी में आती है। बच्ची को पहले भितरवार के एनआरसी में भर्ती किया गया था, जहां से उसकी हालत बिगड़ने पर उसे ग्वालियर रेफर किया गया।

सरकार की योजनाओं की पोल

सरकार महिला और बाल पोषण के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने के दावे करती है, लेकिन प्रियंका की हालत इन दावों की हकीकत सामने ला रही है। बच्ची का वजन 12 किलो होना चाहिए, लेकिन वह सिर्फ 4.3 किलो की है। यह न सिर्फ योजनाओं की विफलता को दर्शाता है, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता भी उजागर करता है।

अस्पताल से रहस्यमय ढंग से गायब

दो दिन पहले ही ग्वालियर के कमला राजा अस्पताल में भर्ती की गई प्रियंका और उसकी मां सुबह 8 बजे से गायब हैं। प्रशासन को आज तक उनकी कोई ठोस जानकारी नहीं हैकोई सीसीटीवी फुटेज, निगरानी या सुरक्षा उपाय नहीं दिखाए गए। यह स्थिति चौंकाने वाली और चिंताजनक है।

जिम्मेदार क्या कह रहे हैं?

परियोजना अधिकारी ओमप्रकाश सिंह का कहना है कि

“बच्ची के माता-पिता 6 महीने से बाहर थे, इसलिए उसे पहले ट्रेस नहीं किया जा सका।”

हालांकि, दस्तक अभियान जैसे सरकारी कार्यक्रम चल रहे हैं, बावजूद इसके प्रियंका जैसी बच्चियां सिस्टम की नज़र से गायब हैं।

राज्य के हालात चिंताजनक

कैग रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश में 1.36 लाख से अधिक बच्चे गंभीर कुपोषण के शिकार हैं। पोषण आहार की गुणवत्ता और परिवहन में ₹858 करोड़ के घोटाले का भी खुलासा हुआ है। यह मामला अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां सभी कलेक्टर्स से कुपोषण पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है।

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