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दमोह अस्पताल कांड में NHRC सख्त, केंद्र और राज्य से मांगी जवाबदेही.

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mpsamwad.com Damoh NHRC Action

NHRC Tough on Damoh Hospital Scandal, Seeks Accountability from Centre and State.

Source -PIB, Edited by Bhopal, MP Samwad.

NHRC has taken serious note of the Damoh hospital scandal where a fake cardiologist allegedly caused seven patient deaths. The commission recommended ₹10 lakh compensation to each victim’s family and license cancellation of the hospital. It also sought action against negligent officials and misuse of Ayushman Bharat funds.

MP संवाद, भोपाल। मध्य प्रदेश के दमोह जिले स्थित मिशन अस्पताल में एक फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट द्वारा इलाज के बाद सात मरीजों की मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने अपनी जांच पूरी कर ली है। जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। आयोग ने इस आधार पर केंद्र और राज्य सरकार को कई सख्त सिफारिशें दी हैं और चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।

यह मामला 28 मार्च 2025 को एक शिकायत के आधार पर NHRC ने दर्ज किया था, जिसके बाद आयोग ने संबंधित राज्य अधिकारियों से रिपोर्ट भी मांगी और स्वतंत्र जांच भी की।

? आयोग की मुख्य सिफारिशें:

  • मृत सातों मरीजों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए मुआवजा दे राज्य सरकार।
  • मिशन अस्पताल का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए जब तक अंतिम निर्णय न हो।
  • राज्य की सभी कैथ लैब्स का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी डॉक्टर विधिवत योग्य हैं।
  • जांच की जाए कि:
    • क्या अस्पताल ने बीमा कराया था और पीड़ित परिवारों को बीमा राशि दी गई?
    • मरीजों को उपचार से पहले संभावित जोखिमों और विकल्पों की जानकारी दी गई थी या नहीं?
  • अस्पताल की भूमि पर हुए अनधिकृत निर्माण की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
  • पुलिस महानिदेशक को आदेश — दोषियों पर गैर-इरादतन हत्या, धोखाधड़ी, चिकित्सकीय लापरवाही, कदाचार, जालसाजी जैसी धाराओं में अलग-अलग FIR दर्ज की जाएं।
  • EOW व आयकर विभाग आयुष्मान भारत योजना के दुरुपयोग व विदेशी अनुदान की जांच करें।
  • शिकायतकर्ताओं को व्हिसल ब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट 2014 के तहत सुरक्षा दी जाए।
  • केंद्र सरकार सभी राज्यों को कैथ लैब्स और आयुष्मान भारत योजना की समीक्षा और सत्यापन के निर्देश दे।

यह मामला अब मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में गंभीर लापरवाही और जवाबदेही का प्रतीक बन गया है।

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