सिस्टम या सिंडिकेट? एम्बुलेंस कर्मी का गर्भवती से पैसे ऐंठने का मामला सामने आया.
System or Syndicate? Ambulance Staff Extorts Money from Pregnant Woman – Shocking Case Exposed!
Sharad Dhaneshwar, Special Correspondent, Balaghat, MP Samwad.
SHOCKING: Ambulance staff extorts ₹600 from laboring woman in Govt’s ‘free healthcare’ promise exposed as drivers demand ‘transport fees’. BMO orders probe amid public outrage.
एम्बुलेंस कर्मी ने प्रसव पीड़िता से ऐंठे 600 रुपये! ‘मुफ्त इलाज’ के दावे पर सवाल। BMO ने जांच के आदेश दिए।
MP संवाद, बालाघाट, लालबर्रा। सरकार “मुफ्त स्वास्थ्य सेवा” का ढिंढोरा पीटती है, लेकिन औल्याकन्हार की पुष्पा भारद्वाज की बेटी मोनिका शिववंशी के साथ हुई घटना ने इस झूठ को बेनकाब कर दिया है।
क्या हुआ?
- मोनिका (गर्भवती) को 108 एम्बुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाने पर ड्राइवर ने 100 रुपये “खर्चा-पानी” के नाम पर ऐंठे।
- CHC लालबर्रा में इलाज न हो पाने पर रेफरल एम्बुलेंस ने 500 रुपये और लिए!
- परिजनों ने मजबूरी में दिए पैसे, लेकिन सवाल यह है: “क्या गरीबों की जिंदगी से खिलवाड़ करना सरकारी नीति है?”
BMO का बयान: “जांच करेंगे”
CHC के BMO डॉ. ऋत्विक पटेल ने मामले को “गंभीर” बताते हुए कहा:
“हमें इसकी जानकारी नहीं थी। विभागीय जांच होगी। गरीबों से पैसे वसूलना अपराध है!”
सिस्टम या सिंडिकेट?
- एम्बुलेंस आरंभा केंद्र से थी। क्या यह अकेले ड्राइवर की मनमानी है या पूरे सिस्टम की लूट?
- सरकार की “मुफ्त सेवाएं” कागजी दावे बनकर रह गई हैं?
हमारा सवाल:
“जब एम्बुलेंस जैसी लाइफलाइन भी ‘कमाई का जरिया’ बने, तो गरीब कहां जाएं?”