महाकुंभ न केवल एक त्यौहार है,बल्कि यह एक आध्यात्मिक शक्ति स्थान है -आनंद।
Mahakumbh is not just a festival; it is a transformative spiritual gathering, uniting seekers worldwide in faith and devotion.
Mahakumbh - A spiritual powerhouse where faith meets divinity.
Mahakumbh is not just a festival, but a spiritual power place – Anand.
Sharad Dhaneshwar, Balaghat, MP Samwad.
लालबर्रा। जनपद पंचायत अन्तर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कजंई के सरपंच अधि.आनंद बिसेन सपरिवार प्रयागराज महाकुंभ 10 फरवरी को पहुचे तथा माघपूर्णिमा के पावन पुनीत स्वर्णिम दिन में प्रयागराज महाकुंभ में वीआईपी त्रिवेणी संगम व अरेल घट त्रिवेणी संगम घाट पर में शाही स्नान कर आस्था श्रद्धा भक्ति कि डुबकी लगाकर अखाड़ों और अघोरी बाबा साधु-संतों के दर्शन किए साथ ही साथ श्री सोमेश्वर महादेव,श्री त्रिवेणी संगम मंदिर के दर्शन किए।
दुरभाष में जानकारी देते हुए श्री बिसेन ने बताया कि 144 साल बाद महाकुंभ हुआ है तथा प्रयागराज नगरी के त्रिवेणी संगम पर महाकुंभ का धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन देश दुनिया के लोगों को आकर्षित कर रहा है महाकुंभ कि शुरुआत 13 जनवरी से हो चुकी है जो कि 26 फरवरी 2025 को समाप्त होगा।श्री बिसेन ने आगे बताया कि महाकुंभ धरती पर होने वाला सबसे शक्तिशाली और आध्यात्मिक रूप से उर्जा से परिपूर्ण आयोजन है।जो हर 144 साल में एक बार 12 पुर्ण कुंभों के पुरे होने के बाद होता है यह दिव्य आयोजन चार पवित्र स्थानों प्रयागराज,हरिद्वार, नासिक व उज्जैन में सम्पन्न होता है महाकुंभ ना केवल एक त्यौहार है बल्कि यह एक आध्यात्मिक शक्ति का स्थान है जहां पृथ्वी और ब्राम्हांड कि शक्तियां एक साथ आती है यह आत्म परिवर्तन शुध्दिकरण और कर्मों के चक्र से मुक्ति पाने का एक अनमोल अवसर प्रदान करता है महाकुंभ के आयोजन का समय खगोलीय गणनाओं पर निर्भर होता है जिसमें बृहस्पति सूर्य और चंद्रमा कि विशेष स्थितियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है इन ग्रहों कि खास अवस्थाएं एक ऊर्जावान वातावरण बनाती है जिससे आध्यात्मिक साधनाएं और ईश्वरीय जुड़ाव कई गुना बढ़ जाते हैं कहा जाता है कि महाकुंभ के दौरान इन ग्रहों की ऊर्जा गंगा यमुना और रहस्यमयी सरस्वती नदियों में प्रवाहित होकर उन्हें उच्च ऊर्जा से भर देती है ये नदियां अध्यात्म जागरण और कर्मों के शुद्धिकरण का माध्यम बन जाती है।