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स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही? विदिशा में सरकारी डॉक्टर चला रहे अवैध क्लीनिक.

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CMHO झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन सरकारी डॉक्टरों की अवैध निजी प्रैक्टिस पर कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया जा रहा?

विदिशा में बिना अनुमति निजी क्लीनिक चला रहे सरकारी डॉक्टर

विदिशा में अवैध निजी क्लीनिकों पर प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार

Negligence of the health department? Government doctors running illegal clinics in Vidisha.

सूचना का अधिकार (RTI), स्थानीय सर्वे एवं विभिन्न समाचार पत्रों से मिली जानकारी के अनुसार.

Bhopal, Kamlesh, Editor, MP Samwad.

विदिशा में जिला अस्पताल के चिकित्सकों एवं मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों द्वारा बिना किसी रजिस्ट्रेशन के निजी प्रैक्टिस करने का मामला सामने आया है। ईदगाह चौराहे से बस स्टैंड तक एवं शहर के अन्य जगहों पर कई शासकीय चिकित्सक खुलेआम मरीज देख रहे हैं, न ही इनके पास कोई क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट है न ही पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ओर न ही BMW सर्टिफिकेट, जो कि एक क्लीनिक चलाने के लिए आवश्यक है. जिससे चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह कहा जाता है कि “दिया तले अंधेरा”, ऐसा ही CMHO योगेश तिवारी की द्वारा किया जा रहा है. विदिशा चिकित्सालय के सामने एवं शहर के अन्य क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है. आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि CMHO योगेश तिवारी ग्यारसपुर ब्लॉक के अटारीखेजरा जाकर एक अवैध मेडिकल क्लीनिक को सील कर सकते है पर अपने जिला अस्पताल रोड पर चल रहे इन अवैध शासकीय चिकित्सकों पर विभाग कार्यवाही करने में असमर्थ है.

विदिशा में 127 पंजीकृत क्लीनिक, लेकिन अवैध निजी प्रैक्टिस जारी

विदिशा जिले में वर्तमान में 127 क्लीनिक, इनमें क्लीनिक, पैथोलॉजी, X-Ray और सोनोग्राफी सेंटर पंजीकृत हैं। इनमें सरकारी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के एक भी डॉक्टर नहीं मिलेंगे. सरकारी डॉक्टरों की अवैध निजी प्रैक्टिस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

सरकारी डॉक्टरों की अवैध प्रैक्टिस: जनता के पैसे की बंदरबांट?

इनमें से कई डॉक्टर ऐसे हैं, जिन्होंने सरकारी स्कॉलरशिप के तहत मेडिकल की पढ़ाई पूरी की है। जिन लोगों ने अपने टैक्स से इनकी शिक्षा की लागत उठाई, अब वही जनता इनकी लापरवाही और निजी प्रैक्टिस से प्रभावित हो रही है।

क्या है पूरा मामला?

विदिशा जिला अस्पताल के कई डॉक्टर ड्यूटी के बाद (और कभी-कभी ड्यूटी के दौरान भी) बिना पंजीकरण के निजी क्लीनिक चला रहे हैं।

? ईदगाह चौराहा से बस स्टैंड तक – ऐसे कई अनधिकृत क्लीनिक हैं, जहां मरीजों का इलाज किया जा रहा है, लेकिन बिना किसी कानूनी स्वीकृति के।

? स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, किसी भी सरकारी डॉक्टर को बिना अनुमति निजी प्रैक्टिस करने की इजाजत नहीं होती। किन्हीं विशेष परिस्थितियों (जैसे महामारी) में ही सरकार की विशेष अनुमति से निजी क्लीनिक संचालित किया जा सकता है।

? डॉक्टरों का ‘ऑन-कॉल’ सिस्टम – स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जब कोई मरीज सरकारी ड्यूटी टाइम में निजी क्लीनिक पर पहुंचता है, तो मेडिकल स्टाफ डॉक्टर को फोन कर देता है। डॉक्टर तुरंत क्लीनिक पहुंचकर मरीज को देखते हैं और फिर वापस अस्पताल आ जाते हैं।

स्थानीय लोगों की राय

? स्वास्थ्य सेवाओं पर असर – स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए, लेकिन निजी प्रैक्टिस के कारण सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
? कानूनी कार्रवाई की मांग – लोगों का सवाल है कि जब झोलाछाप डॉक्टरों पर सख्ती हो रही है, तो सरकारी डॉक्टरों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?

क्या होगी अगली कार्रवाई?

अब सवाल यह उठता है कि प्रशासन इन अनियमितताओं पर क्या कदम उठाएगा? क्या सरकारी डॉक्टरों की अवैध निजी प्रैक्टिस पर कोई सख्त कार्रवाई होगी, या यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?

? आपकी राय क्या है? क्या प्रशासन को सरकारी डॉक्टरों के खिलाफ भी कार्रवाई करनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में साझा करें!

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