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छात्रों की पढ़ाई होगी आसान! ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर जिला प्रशासन की सख्ती.

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परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए, जिला प्रशासन ने तेज आवाज में बजने वाले ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।

परीक्षा के दौरान ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर प्रतिबंध से जुड़ी सूचना

नरसिंहपुर में ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर जिला प्रशासन की सख्ती

Students’ studies will become easier! Strict action by the district administration on sound amplifying devices.

Correspondent, Narsinghpur, MP Samwad.

नरसिंहपुर। जिला दंडाधिकारी शीतला पटले ने स्कूल और कॉलेज की परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए जिले में तेज आवाज में बजने वाले ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985 की धारा 10 के तहत जिले की राजस्व सीमाओं में लागू किया गया है और 31 जनवरी 2025 से प्रभावी होगा।

ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर सख्ती
जिला दंडाधिकारी के आदेश के अनुसार, बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के लाउडस्पीकर, डेक, डीजे, बैंड-बाजा या अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों का निजी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में उपयोग नहीं किया जा सकेगा। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, रात्रि 10 बजे से प्रातः 6 बजे तक इन यंत्रों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

आवश्यक मामलों में सीमित अनुमति
जिले के समस्त अनुविभागीय दंडाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही प्रातः 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों के 1/4 वॉल्यूम (ध्वनि स्तर परिवेशी ध्वनि से अधिकतम 10 डेसीबल तक) उपयोग की अनुमति दी जाए। यह अनुमति मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985 की धारा 7 के उपबंधों को ध्यान में रखते हुए दी जाएगी।

आदेश के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई
मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985 की धारा 16(1) के तहत, हेड कांस्टेबल या उससे उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारी इस आदेश के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित ध्वनि विस्तारक यंत्र को जब्त कर कार्रवाई कर सकते हैं। साथ ही, उल्लंघन करने वालों के खिलाफ धारा 15 के अंतर्गत दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।

परीक्षाओं में व्यवधान रोकने के लिए आदेश
गौरतलब है कि वर्तमान में स्कूल और कॉलेजों की परीक्षाएँ निकट हैं। तेज आवाज वाले ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग से छात्रों की पढ़ाई बाधित होती है, जिससे उनकी परीक्षा की तैयारी प्रभावित होती है और उनके भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, जिला दंडाधिकारी ने यह आदेश जारी किया है।

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