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उत्तराखंड में होटल और ढाबा कर्मचारियों के पुलिस वैरिफिकेशन को अनिवार्य किया, नहीं तो लगेगा 1 लाख का जुर्माना

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देहरादून

उत्तराखंड सरकार ने  खाने में थूकने से जुड़ी घटनाओं को रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं. उन्होंने ऐसा करने वालों पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने की घोषणा की है. इसके साथ ही होटल और ढाबा कर्मचारियों के पुलिस वैरिफिकेशन को अनिवार्य किया गया है और उनकी रसोई में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने का आदेश है.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा ऐसी घटनाओं पर चिंता जताए जाने के कुछ दिनों बाद राज्य पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने अलग-अलग दिशानिर्देश जारी किए और कहा कि अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

हाल ही में मसूरी में दो लोगों को पर्यटकों को जूस परोसने से पहले गिलासों में कथित तौर पर थूकने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. इसके अलावा देहरादून से एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें एक रसोइये को रोटी के लिए आटा बनाते समय कथित तौर पर थूकते हुए देखा जा सकता है.

'किसी भी तरह की अशुद्धता बर्दाश्त नहीं'

  स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि आने वाले त्योहारी सीजन के दौरान खाने की सुरक्षा और शुद्धता उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. रावत ने कहा, त्योहारों के दौरान किसी भी तरह की अशुद्धता या असामाजिक गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी.पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार ने अपराधियों को मुख्यमंत्री की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए जिला पुलिस प्रमुखों को दिशानिर्देश जारी किए.

'व्यापार प्रबंधकों की रसोई में हों CCTV'

दिशानिर्देशों में कहा गया है कि होटल और ढाबों जैसे व्यापारिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले लोगों का 100 प्रतिशत वैरिफिकेशन किया जाना चाहिए, साथ ही व्यापार प्रबंधकों को अपनी रसोई में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.

खूफिया यूनिट की मदद से कार्ट्स की निगरानी

जिला पुलिस को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, खोखे और पुशकार्ट जैसी खुली जगहों पर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वे स्थानीय खूफिया यूनिट की मदद ले सकते हैं.दिशानिर्देशों में कहा गया है कि गश्त के दौरान इस पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए.

होटलों और ढाबों की होगी रैंडम चेकिंग

प्रावधानों के मुताबिक पुलिस होटलों और ढाबों पर रैंडम चेकिंग के लिए स्वास्थ्य और खाद्य विभाग की मदद भी ले सकती है. डीजीपी ने कहा कि अपराधियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 274 (बिक्री के लिए खाद्य और पेय पदार्थों में मिलावट) और उत्तराखंड पुलिस अधिनियम की धारा 81 (सार्वजनिक उपद्रव पैदा करने, जानबूझकर अफवाह फैलाने या गलत अलार्म पैदा करने के लिए बिना वारंट के गिरफ्तारी) के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए.  

यदि अधिनियम का धर्म, जातियता, भाषा आदि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो प्रासंगिक धारा 196 (1) (बी) (धर्म, जाति, भाषा, जन्म स्थान के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) या बीएनएस की धारा 299 (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य जिनका उद्देश्य भारत में नागरिकों के किसी भी वर्ग के धार्मिक विश्वासों या धर्म का अपमान करना है) के तहत भी कार्रवाई की जानी चाहिए.

1 लाख रुपये तक के जुर्माने सहित सख्त कार्रवाई

दिशानिर्देशों में कहा गया है कि स्वास्थ्य और खाद्य विभाग, नगर निगम/जिला पंचायत, नगर परिषदों और स्थानीय लोगों के समन्वय से एक जन जागरूकता अभियान भी चलाया जाना चाहिए.स्वास्थ्य सचिव और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त आर राजेश कुमार ने एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की, जिसमें अपराधियों के खिलाफ 25,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक के जुर्माने सहित सख्त कार्रवाई का आदेश दिया गया है.

कुमार ने कहा कि देहरादून और मसूरी में होटलों और ढाबों जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों में थूकने की घटनाओं के वीडियो का संज्ञान लेते हुए और मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में दिशानिर्देश जारी किए गए हैं.इधर मंगलवार को, पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार ने कहा कि वह थूकने या किसी अन्य मानव अपशिष्ट को मिलाकर भोजन को प्रदूषित करने को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध बनाने के लिए दो अध्यादेश लाएगी.
 

 

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