दर्जनों मौतों के बाद भी नहीं बदला हाल: जगला में स्कूल नहीं, तबलुटोला में साफ़ पानी नहीं.
Dozens of Deaths, Yet Nothing Has Changed: No School in Jagla, No Clean Water in Tabalutola.

MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल।
विशेष संवाददाता: आनंद तामरकर, बालाघाट।
बालाघाट। जिले के आदिवासी-बाहुल्य क्षेत्रों के विकास के लिए 500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि विभिन्न योजनाओं में स्वीकृत हुई। कागज़ों में उपयोग भी बता दिया गया, पर ज़्यादातर बैगा गांवों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव आज भी बना है। बच्चों की लगातार मौतों के बाद यह इलाका राष्ट्रीय सुर्खियों में है, और मीडिया की पहुंच ने ज़मीनी हकीकत उजागर कर दी।
आंकड़ों की चमक, गांव की हकीकत
प्रशासन अब गांव-गांव स्वास्थ्य सेवा, बिजली, स्वच्छ पेयजल, नल योजनाओं और पौष्टिक आहार के आंकड़े जारी कर सतत निगरानी की बात कर रहा है। दावा है कि 47,928 लोगों की स्क्रीनिंग हुई और 905 सत्रों में 40,835 बच्चों का टीकाकरण किया गया। मलेरिया रोकथाम के लिए 75 गांवों के 9,059 मकानों में कीटनाशक छिड़काव और 45 गांवों के 8,653 घरों में इनडोर-आउटडोर फॉगिंग बताई गई है। सवाल यह है कि ये आंकड़े ज़मीन पर कहां दिखते हैं?
तबलुटोला: जंग लगे हैंडपंप का पानी
ग्राम पंचायत नव्ही के 45 परिवारों वाले तबलुटोला में ग्रामीणों के अनुसार हैंडपंप से मटमैला, जंग लगा पानी निकलता है, जिसमें फ्लोराइड की शिकायत भी है। ग्रामीणों का कहना है कि इस पानी में पकाने पर चावल काला पड़ जाता है। पीने के लिए वे झिरिया और नदी पर निर्भर हैं। उनके अनुसार कोई ज़िम्मेदार अधिकारी आज तक गांव नहीं पहुंचा। अधिकारी कब पहुंचेंगे, और आदिवासी परिवारों को बुनियादी सुविधाओं का लाभ कब मिलेगा?
जगला: न स्कूल, न स्वास्थ्य केंद्र, जवाब में बस ‘निर्देश’
राहुल गांधी के आगमन से चर्चित जगला में न स्कूल है, न स्वास्थ्य केंद्र। नव्ही से जगला तक करीब चार किलोमीटर का ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्ता पैदल तय करना पड़ता है।
शिकायत पर बैहर विधायक संजय उइके ने कहा कि सरपंच ने उनका ध्यान दिलाया था और उन्होंने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के कार्यपालन यंत्री को हैंडपंप सुधारने के निर्देश दिए हैं। कार्यपालन यंत्री बी.एल. उइके ने बताया कि शिकायत मिली है और कल टीम तबलुटोला जाकर सुधार करेगी।
पर सवाल एक हैंडपंप का नहीं है। क्या शिकायत मीडिया में आने के बाद ही सुनी जाएगी? और जब आंकड़ों में सब कुछ हो चुका है, तब 500 करोड़ की योजनाओं का असर कहां है?
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