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पुलिस को 29 सितंबर से थी कार्यक्रम की खबर, फिर शीर्ष अधिकारी मौके पर क्यों नहीं? कांग्रेस ने उठाए सवाल.

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Police Knew of the Programme Since September 29, So Why Were Top Officials Absent? Congress Raises Questions.

बालाघाट के बैहर क्षेत्र में राहुल गांधी के दौरे के बाद प्रशासनिक प्रोटोकॉल पर कांग्रेस के सवाल
राहुल गांधी के बालाघाट दौरे के बाद कलेक्टर-एसपी की मौजूदगी पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। अधिकारियों का पक्ष उपलब्ध नहीं। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। विशेष संवाददाता: आनंद ताम्रकार

बालाघाट में मृत आदिवासी बच्चों के परिजनों से मिलने पहुंचे राहुल गांधी के दौरे के बाद अब प्रशासनिक प्रोटोकॉल पर नया विवाद उठा है। एमपी ब्रेकिंग न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के कार्यक्रम में मौजूद न रहने पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है और दस्तावेज-आधारित जांच की मांग की है।

29 सितंबर को पुलिस ने मांगी थी कार्यक्रम की जानकारी

रिपोर्टों के मुताबिक बालाघाट पुलिस ने 29 सितंबर को बैहर विधायक एवं कांग्रेस जिला अध्यक्ष संजय उइके से प्रस्तावित कार्यक्रम का ब्योरा मांगा था। इसमें संभावित भीड़, स्वयंसेवक, पार्किंग, यातायात और राहुल गांधी से मिलने वाले लोग शामिल थे। पत्र में क्षेत्र को संवेदनशील और पूर्व नक्सल प्रभावित बताया गया था। सवाल यही है कि जब पुलिस स्तर पर जानकारी पहले से थी, तो शीर्ष अधिकारी मौके पर क्यों नहीं दिखे? उपलब्ध रिपोर्टों में अधिकारियों का पक्ष या आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है।

कांग्रेस की मांग: ड्यूटी चार्ट और लिखित आदेश

पटवारी ने कथित तौर पर पूछा है कि दौरे की सूचना प्रशासन और पुलिस को कब मिली, किन स्तरों से लिखित निर्देश जारी हुए, और कलेक्टर-एसपी के लिए कोई ड्यूटी चार्ट या प्रोटोकॉल तय था या नहीं। उन्होंने यह भी जानना चाहा है कि अनुपस्थिति की स्थिति में किसी अन्य अधिकारी को औपचारिक रूप से अधिकृत किया गया था या नहीं। कांग्रेस ने सुरक्षा समन्वय की बैठकों और रिकॉर्ड की समीक्षा की मांग भी की है।

भाजपा का पलटवार: व्यवस्थाएं की गई थीं

भाजपा ने आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि दौरे के लिए प्रशासन ने आवश्यक व्यवस्थाएं की थीं और बिना तथ्य के आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए। अब केंद्र में सवाल यह है कि क्या आदेश, ड्यूटी चार्ट और सुरक्षा समन्वय के दस्तावेज सार्वजनिक होंगे?

बच्चों की मौत के संवेदनशील मामले के बीच यह विवाद बयानबाजी से आगे बढ़कर दस्तावेजों और जवाबदेही की मांग बनता दिख रहा है।

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