9 सरकारी मेडिकल कॉलेजों को PPP में देने की तैयारी पर सरकार पीछे हटी, सवाल अब भी बाकी.
Government Backs Off Plan to Hand 9 Government Medical Colleges to PPP Model, But Questions Remain.

Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, भोपाल।
नौ सरकारी मेडिकल कॉलेज और 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निजी हाथों में सौंपने की चर्चा ने मध्यप्रदेश में सियासी और चिकित्सा जगत में हलचल मचा दी थी। विरोध के स्वर तेज होते ही सरकार ने कदम पीछे खींच लिए हैं। अब बड़ा सवाल यही है कि प्रस्ताव आया ही क्यों था?
नीमच से दमोह तक, किन कॉलेजों पर थी नजर?
सितंबर के तीसरे सप्ताह में खबर आई कि नीमच, श्योपुर, सिंगरौली, मंडला, राजगढ़, बुधनी, छतरपुर, दमोह सहित अन्य संस्थानों को PPP (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल पर चलाने की तैयारी है। इसके बाद चिकित्सा संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने सवाल उठाए कि जिन कॉलेजों को सरकारी संसाधनों से बनाया गया, उनके संचालन में निजी भागीदारी की जरूरत क्यों पड़ी।
दबाव के बीच सरकार का यू-टर्न
24 सितंबर को उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य-चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा बनाए गए या सरकारी धन से निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों का संचालन और रखरखाव सरकार ही करेगी। 27 सितंबर की रिपोर्टों में भी कहा गया कि निजी ऑपरेटरों को सौंपने की प्रस्तावित योजना वापस ले ली गई है। इनमें कुछ कॉलेज पहले से चल रहे हैं और वहां MBBS की पढ़ाई जारी है।
असली सवाल: प्रस्ताव क्यों आया, वापसी क्यों हुई?
सरकार ने PPP को सेवाओं और मेडिकल शिक्षा के विस्तार का जरिया बताया था, लेकिन सरकारी निवेश, फीस, अस्पताल सेवाओं और निजी भूमिका पर बहस छिड़ गई। जब सरकार खुद MBBS सीटें बढ़ाने की बात कर रही है, तब संचालन को लेकर यह असमंजस क्यों? फैकल्टी, सुविधाओं और मरीजों की सेवाओं पर निगरानी आगे भी जरूरी रहेगी।
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