कोर्ट के सामने जवाबदेही तय — छिंदवाड़ा SP और पन्ना कलेक्टर पर हाईकोर्ट सख्त.
Accountability Before the Court — High Court Cracks Down on Chhindwara SP and Panna Collector.

MP संवाद समाचार, जबलपुर/भोपाल। मध्यप्रदेश में हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन से जुड़े मामलों में जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। छिंदवाड़ा SP और पन्ना कलेक्टर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किए गए हैं। दोनों मामलों में अदालत ने संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं।
छिंदवाड़ा SP के खिलाफ क्यों जारी हुआ NBW?
हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अवमानना मामले की सुनवाई के दौरान छिंदवाड़ा के पुलिस अधीक्षक अजय पांडे के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया। रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत के आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत नहीं की गई और नोटिस के बावजूद SP की अदालत में उपस्थिति भी नहीं हुई। कोर्ट ने जबलपुर रेंज के IG को वारंट की तामील सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। SP को 1 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट के समक्ष पेश करने का आदेश दिया गया है।
पन्ना कलेक्टर उषा परमार के मामले में भी कोर्ट सख्त
दूसरे मामले में हाईकोर्ट ने पन्ना कलेक्टर उषा परमार के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। यह कार्रवाई अवमानना याचिका में अदालत के पूर्व आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं किए जाने के बाद की गई। कोर्ट ने कलेक्टर को 30 सितंबर 2026 को न्यायालय के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। वारंट की तामील की जिम्मेदारी पन्ना SP को दी गई है।
कोर्ट के आदेशों का पालन बना बड़ा सवाल
दोनों मामलों में सामने आया घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण न्यायिक सिद्धांत की ओर ध्यान खींचता है—अदालत के आदेशों का समय पर अनुपालन और उसकी रिपोर्ट न्यायिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। हालांकि, इन आदेशों को संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अंतिम दोष सिद्धि के रूप में नहीं देखा जा सकता। आगे की सुनवाई और अदालत के समक्ष प्रस्तुत होने के बाद मामलों की स्थिति स्पष्ट होगी।
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