FCI से प्लांट के नाम पर निकला सरकारी चावल कहां गया? 3 ट्रकों से खुली गोंदिया कनेक्शन की परत”
Where Did the Government Rice Dispatched from FCI in the Name of the Plant Go? Three Trucks Uncovered the Gondia Connection.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट। एथेनॉल प्लांट की आड़ में सरकारी चावल की कथित हेराफेरी का मामला अब सिर्फ कुछ राइस मिलर्स की भूमिका तक सीमित होता दिखाई नहीं दे रहा है। एसआईटी की जांच में सामने आए कथित बयानों और परिवहन की कड़ियों ने एफसीआई से निकलने वाले चावल के गोंदिया तक पहुंचने को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे अहम सवाल जनवरी 2026 की उस घटना को लेकर है, जब खैरलांजी क्षेत्र में चावल से भरे तीन ट्रक पकड़े गए थे। जानकारी के अनुसार, कलेक्टर बालाघाट के निर्देश पर तत्कालीन एसडीएम कार्तिकेय जयसवाल ने थाना प्रभारी खैरलांजी को संदेश भेजकर तीनों ट्रकों को पुलिस अभिरक्षा में थाने में खड़ा करवाया था। बताया जा रहा है कि उस समय ड्राइवरों के पास किसी भी प्रकार के दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे।
ऐसे में अब सवाल और गंभीर हो जाता है—जब ट्रक पुलिस अभिरक्षा में खड़े थे और दस्तावेजों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी, तो उन्हें थाने से बाहर ले जाने की अनुमति किसके आदेश पर दी गई? ट्रकों को किस अधिकारी या किस स्तर के निर्देश पर छोड़ा गया?
दस्तावेज नहीं थे तो ट्रक किसके आदेश पर छोड़े गए?
जानकारी के अनुसार 7 जनवरी 2026 को खैरलांजी थाना पुलिस ने खैरी के पास चावल से भरे तीन ट्रकों को रोका था। बताया गया कि ये ट्रक एफसीआई से एवीजे एथेनॉल प्लांट, बोरगांव, छिंदवाड़ा के लिए जारी चावल लेकर जा रहे थे।
यदि उस समय ड्राइवरों के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं थे और कलेक्टर के निर्देश पर ट्रकों को पुलिस अभिरक्षा में थाने में खड़ा कराया गया था, तो उनके बाद में छोड़े जाने की पूरी प्रक्रिया जांच के दायरे में आनी चाहिए।
क्या किसी अधिकारी ने लिखित आदेश दिया था? क्या दस्तावेज बाद में प्रस्तुत किए गए? किसने उनकी सत्यता जांची? क्या ट्रकों की वास्तविक मंजिल का सत्यापन किया गया?
और सबसे अहम—अगर उस समय ट्रकों को नहीं छोड़ा जाता और चावल की पूरी जांच होती, तो क्या कथित चावल डायवर्जन की कड़ी कई महीने पहले सामने नहीं आ सकती थी?
गोंदिया ट्रेडर्स और मिलर्स की भूमिका पर जांच की नजर
एसआईटी की जांच में गोंदिया के एक ट्रेडर जय अग्रवाल की भूमिका सामने आने का दावा किया जा रहा है। पुलिस को दिए गए कथित बयानों में कुछ मिलर्स द्वारा ट्रेडर के माध्यम से चावल मिलने की जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है।
बताया जा रहा है कि पुलिस से छूटने के बाद तीनों ट्रकों का रुख एवीजे एथेनॉल प्लांट के बजाय गोंदिया की ओर हुआ और वहां एक राइस मिल में चावल उतारे जाने की बात जांच में सामने आई है।
हालांकि ट्रेडर की भूमिका और इन बयानों की अंतिम आधिकारिक पुष्टि जांच एजेंसी की रिपोर्ट से होना बाकी है। जांच का दायरा अब इस सवाल तक पहुंचता दिख रहा है कि एफसीआई से निकलने के बाद सरकारी चावल किन-किन लोगों के संपर्क में आया और उसकी अंतिम मंजिल क्या थी।
19 गिरफ्तारियां, लेकिन जनवरी के सवालों का जवाब कौन देगा?
सरकारी चावल की कथित हेराफेरी मामले में अब तक 19 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। कुछ आरोपी जमानत पर बाहर बताए जा रहे हैं, जबकि फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
लेकिन अब जांच की असली परीक्षा पूरे नेटवर्क के साथ-साथ प्रशासनिक निर्णयों की भी पड़ताल में है।
जनवरी में पुलिस अभिरक्षा में खड़े तीन ट्रकों को छोड़ने का आदेश किसने दिया? क्या उसका कोई लिखित रिकॉर्ड है? क्या उस समय वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी थी? क्या ट्रकों में लदे चावल की वास्तविक मंजिल की पुष्टि की गई?
यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि वही चावल बाद में एथेनॉल प्लांट के बजाय अन्य मिलों तक पहुंचा, तो ट्रकों को छोड़े जाने की पूरी प्रक्रिया और उस समय निर्णय लेने वाले स्तर की भूमिका की भी जांच जरूरी होगी।
क्योंकि सरकारी चावल की कथित हेराफेरी की जांच केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जनता को यह भी जानने का अधिकार है कि जिस जगह से कथित खेल शुरू हुआ, वहां सिस्टम की निगरानी आखिर कहां थी और किस स्तर पर चूक हुई?
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