जर्जर स्कूल, खतरे में बच्चे! कटनी के सिहुड़ी में ‘शिक्षा’ या जोखिम की पाठशाला?
Dilapidated School, Children at Risk! Katni’s Sihudi Faces a Stark Question: ‘Education’ or a School of Danger?

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News
MP संवाद समाचार, कटनी/भोपाल। कटनी जिले में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी तस्वीर एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जन शिक्षा केंद्र स्लीमनाबाद अंतर्गत शासकीय एकीकृत माध्यमिक शाला सिहुड़ी (छपरा) का माध्यमिक शाला भवन जर्जर हालत में पहुंच चुका है। भवन की छत से बारिश का पानी रिस रहा है, जगह-जगह प्लास्टर उखड़ रहा है और कक्षों की स्थिति विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर रही है।
हालात ऐसे हैं कि कक्षा 6वीं से 8वीं तक के विद्यार्थियों को जर्जर भवन के बजाय अतिरिक्त कमरों में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। सवाल यह है कि जब विभाग को भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी है और प्रस्ताव भी जिला स्तर पर भेजा जा चुका है, तो मरम्मत के लिए राशि स्वीकृत होने और काम शुरू होने में आखिर कितना इंतजार बाकी है?
छत से रिसता पानी, उखड़ता प्लास्टर और बच्चों पर मंडराता खतरा
हालिया बारिश ने स्कूल भवन की हालत और उजागर कर दी है। जर्जर भवन की छत से पानी रिसने की बात सामने आई है। वहीं कई स्थानों पर प्लास्टर उखड़ने से विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
स्कूल प्रबंधन के अनुसार माध्यमिक शाला भवन के तीनों कक्ष जर्जर हो चुके हैं। इसी वजह से कक्षा 6वीं से 8वीं तक की कक्षाएं अतिरिक्त भवन में संचालित की जा रही हैं।
यह व्यवस्था फिलहाल विद्यार्थियों को सीधे जर्जर कक्षों से दूर रख रही है, लेकिन क्या किसी सरकारी स्कूल में वर्षों तक अस्थायी व्यवस्था ही स्थायी समाधान बन सकती है?
विभाग को जानकारी, उपयंत्री ने देखा भवन, फिर भी मरम्मत का इंतजार
विद्यालय के प्रधानाध्यापक वीरेंद्र विश्वकर्मा के अनुसार भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी जनपद शिक्षा केंद्र को दी जा चुकी है। सर्व शिक्षा अभियान के उपयंत्री को भी मौके पर बुलाकर भवन की स्थिति दिखाई गई।
प्रधानाध्यापक के मुताबिक इसके बाद भवन की मरम्मत के लिए उपयंत्री द्वारा जिला स्तर पर प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया है। अब राशि स्वीकृत होने के बाद मरम्मत कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
यानी समस्या की जानकारी विभाग को है, मौके का निरीक्षण भी हो चुका है और प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है—लेकिन बच्चों की सुरक्षा के लिए स्थायी समाधान अभी कागज से जमीन तक नहीं पहुंचा है।
‘अतिरिक्त कमरे’ से कब तक चलेगी पढ़ाई?
बीआरसीसी प्रशांत मिश्रा ने बताया कि शासकीय एकीकृत माध्यमिक शाला सिहुड़ी के भवन के जर्जर होने की जानकारी मिलने के बाद सर्व शिक्षा अभियान के उपयंत्री और जिला स्तर के अधिकारियों को अवगत कराया गया है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल कक्षा 6वीं से 8वीं तक के विद्यार्थियों को अतिरिक्त भवन में बैठाया जा रहा है और आगे की प्रक्रिया शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा पूरी की जाएगी।
लेकिन बारिश के मौसम में भवन की स्थिति को देखते हुए सवाल केवल मरम्मत का नहीं, सुरक्षा की प्राथमिकता का भी है। यदि भवन पहले से जर्जर घोषित स्थिति में है तो स्थायी मरम्मत या नए भवन की व्यवस्था में देरी विद्यार्थियों के लिए अनावश्यक जोखिम पैदा कर सकती है।
सरकार के ‘शिक्षा के अधिकार’ के बीच जर्जर भवन क्यों?
शिक्षा केवल किताब, शिक्षक और कक्षा तक सीमित नहीं है। सुरक्षित वातावरण भी शिक्षा व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा है। ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में भवनों की स्थिति लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है।
सिहुड़ी का मामला भी यही सवाल सामने रखता है कि जब विभाग स्वयं जर्जर स्कूल भवनों की जानकारी जुटाता है, तो चिन्हित भवनों की मरम्मत और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है?
फिलहाल सिहुड़ी स्कूल के बच्चों को अतिरिक्त कमरे में पढ़ाया जा रहा है। अब निगाहें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन पर हैं कि प्रस्ताव कब स्वीकृत होता है और जर्जर भवन की मरम्मत कब शुरू होती है।
बच्चों की सुरक्षा किसी बजट स्वीकृति की तारीख का इंतजार नहीं कर सकती।
प्रशासन से अपेक्षित कदम
- जर्जर भवन का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए।
- विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित रखी जाए।
- मरम्मत/पुनर्निर्माण प्रस्ताव की स्वीकृति की स्थिति सार्वजनिक की जाए।
- बारिश के दौरान भवन की सुरक्षा का नियमित निरीक्षण किया जाए।
- कार्य स्वीकृत होने पर निर्माण/मरम्मत की समयसीमा तय की जाए।
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