न अनुमति, न ले-आउट… फिर कैसे बस गई कॉलोनी? गर्रा में 8 लोगों पर FIR के निर्देश.
No Permission, No Approved Layout… Then How Was the Colony Developed? FIR Ordered Against 8 People in Garra.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट जिले में शासकीय भूमि पर कथित अवैध प्लॉटिंग और बिना अनुमति कॉलोनी विकसित करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है। वारासिवनी एसडीएम कार्तिकेय जायसवाल ने लालबर्रा तहसील के ग्राम गर्रा में अवैध कॉलोनी विकास से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में कुल आठ लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जारी किए हैं।
23 जुलाई 2026 को पारित आदेश के अनुसार, तहसीलदार लालबर्रा की जांच में ग्राम गर्रा के विभिन्न खसरा नंबरों की भूमि पर सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना कथित रूप से प्लॉटिंग कर कॉलोनी विकसित किए जाने का मामला सामने आया।
जांच के दौरान संबंधित पक्षों की ओर से कॉलोनी विकास के लिए आवश्यक स्वीकृतियां, ले-आउट अनुमोदन और विकास अनुज्ञा प्रस्तुत नहीं किए जाने की बात सामने आई। इसके अलावा, प्रशासनिक जांच में शासकीय भूमि पर कच्ची सड़क, पुलिया और अन्य निर्माण कर कथित अतिक्रमण किए जाने की भी जानकारी सामने आई।
मामला सामने आने के बाद अब प्रशासन ने न केवल संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है, बल्कि भविष्य में अवैध प्लॉटिंग और निर्माण पर भी निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
बिना अनुमति प्लॉटिंग और कॉलोनी विकास? प्रशासनिक जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
एसडीएम न्यायालय के आदेश के अनुसार, ग्राम गर्रा में कथित कॉलोनी विकास के लिए आवश्यक वैधानिक अनुमतियां और दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। प्रशासन की ओर से संबंधित पक्षों को पूर्व में नोटिस जारी कर सुनवाई का अवसर भी दिया गया था।
बताया गया है कि सुनवाई और नोटिस के बावजूद संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए।
यह कार्रवाई मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 61-घ के तहत की गई कार्यवाही के संदर्भ में सामने आई है।
अब सवाल यह है कि यदि शासकीय भूमि पर बिना अनुमति सड़क, पुलिया और अन्य निर्माण किए गए थे, तो इन गतिविधियों पर समय रहते रोक क्यों नहीं लग सकी? क्या संबंधित भूमि पर लंबे समय से प्लॉटिंग और कॉलोनी विकास की गतिविधियां चल रही थीं? इन सवालों का जवाब प्रशासनिक कार्रवाई के आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगा।
दो मामलों में 8 लोगों पर FIR के निर्देश, अब पुलिस कार्रवाई की बारी
एसडीएम न्यायालय के आदेश के अनुसार, पहले प्रकरण में जितेन्द्र उर्फ बुलेश्वर डहाके, अनीता राजेश टेम्भरे, अर्चना देवेन्द्र बोपेचे और सुनील वल्द लोखिराम हनवत के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, दूसरे प्रकरण में दिलीप भैरम, जितेन्द्र वल्द बुलेश्वर, सोमेश्वर वल्द मोहनसिंह गोंड और इंदिरा जौजे उत्तमचंद कोठारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रशासन के आदेश के बाद अब संबंधित राजस्व अधिकारियों और पुलिस की कार्रवाई पर नजर है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में यह स्पष्ट होगा कि कथित अवैध प्लॉटिंग, शासकीय भूमि पर निर्माण और अन्य आरोपों के संबंध में वास्तविक स्थिति क्या है।
यह भी महत्वपूर्ण है कि एफआईआर दर्ज होना किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि नहीं है। मामले में अंतिम जिम्मेदारी और दोष का निर्धारण जांच तथा न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद ही होगा।
अवैध प्लॉटिंग पर प्रशासन का ‘जीरो टॉलरेंस’ संकेत, बिक्री और निर्माण पर भी नजर
एसडीएम कार्तिकेय जायसवाल ने राजस्व निरीक्षक और संबंधित हल्का पटवारी को आदेश का तत्काल पालन करते हुए निर्धारित समय-सीमा में एफआईआर दर्ज कराने तथा उसकी प्रति न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही तहसीलदार लालबर्रा को निर्देशित किया गया है कि संबंधित व्यक्तियों द्वारा भविष्य में अवैध भूखंडों के विक्रय या निर्माण की कोई जानकारी सामने आती है, तो तत्काल न्यायालय को अवगत कराया जाए।
प्रशासन की यह कार्रवाई जिले में अवैध कॉलोनियों और अनधिकृत प्लॉटिंग के खिलाफ सख्त संदेश के तौर पर देखी जा रही है। हालांकि, अब असली सवाल यह है कि क्या कार्रवाई केवल एफआईआर तक सीमित रहेगी या शासकीय भूमि पर हुए कथित अतिक्रमण और अवैध निर्माण को भी हटाने की ठोस कार्रवाई होगी?
यदि प्रशासन इस मामले में जमीन के रिकॉर्ड, प्लॉट बिक्री, निर्माण अनुमति और कथित कॉलोनी के विकास से जुड़े सभी दस्तावेजों की गहन जांच करता है, तो अवैध कॉलोनी नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।
फिलहाल, प्रशासन के आदेश के बाद जिले में अवैध प्लॉटिंग करने वालों में हलचल है और निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एफआईआर के बाद पुलिस जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
Legal Disclaimer
This report is based on administrative orders and allegations; FIR directions do not establish guilt, which remains subject to investigation and final judicial determination.