कानून, विज्ञान और पुलिस का संगम! विदिशा मेडिकल कॉलेज में फॉरेंसिक ज्ञान का महाकुंभ.
Confluence of Law, Science and Policing! A Grand Conclave of Forensic Knowledge at Vidisha Medical College.

Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, विदिशा। Atal Bihari Vajpayee Medical College में 12 मई को नेशनल Indian Academy of Forensic Medicine (IAFM) डे, जिसे नेशनल फॉरेंसिक डे के रूप में मनाया जाता है, उत्साहपूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिले के सभी थानों से पुलिस अधिकारी, मेडिकल ऑफिसर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) तथा अन्य चिकित्सक उपस्थित रहे।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि रोहित काशवानी, महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मनीष निगम, अस्पताल अधीक्षक डॉ. अविनाश लाघवे, Forensic Science Laboratory की वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. प्रीति गायकवाड़, मेडिको लीगल इंस्टीट्यूट भोपाल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जितेंद्र तोमर तथा फॉरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. नरेंद्र सिंह पटेल द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
पैनल चर्चा में उठे मेडिको-लीगल चुनौतियों के व्यावहारिक पहलू
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसका संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. विवेक चौकसे ने किया।
विशेषज्ञों ने निम्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की:
- मेडिको-लीगल कार्यों में व्यावहारिक चुनौतियाँ
- अपराध स्थल जांच
- Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS)
- Crime and Criminal Tracking Network and Systems (CCTNS)
- पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों के बीच समन्वय
पुलिस अधिकारियों और चिकित्सकों ने भी विशेषज्ञों से अपने प्रश्न पूछे और जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
चैन ऑफ कस्टडी मजबूत करने पर एसपी ने दिया जोर
पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी ने मेडिको-लीगल मामलों में “चेन ऑफ कस्टडी” को बेहतर बनाए रखने के लिए पुलिस, फॉरेंसिक विशेषज्ञों और एफएसएल अधिकारियों के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने सुझाव दिया कि बेहतर संवाद के लिए व्हाट्सऐप समूह बनाए जा सकते हैं तथा जांच अधिकारियों को टैबलेट उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिससे कागजी कार्यवाही कम हो सके।
दस्तावेज़ीकरण, BNS और BNSS पर विशेषज्ञ व्याख्यान
द्वितीय सत्र में डॉ. नरेंद्र सिंह पटेल ने “प्रैक्टिकल इश्यूज़ इन मेडिको-लीगल डॉक्यूमेंटेशन” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) और BNSS से जुड़े विधिक परिवर्तनों की जानकारी दी।
इसके बाद डॉ. जितेंद्र तोमर ने चोटों के प्रकार और उनकी वैज्ञानिक व्याख्या पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
स्किल लैब में पुलिस अधिकारियों को दिया गया CPR प्रशिक्षण
कार्यक्रम के समापन पर निश्चेतना विभाग की डॉ. ज्योति रघुवंशी ने महाविद्यालय की स्किल लैब में सभी पुलिस अधिकारियों को CPR (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) तथा आपातकालीन जीवन रक्षक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
कानून, विज्ञान और पुलिस समन्वय का सशक्त मंच
यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पुलिस, चिकित्सा और फॉरेंसिक विज्ञान के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम मेडिको-लीगल जांच को अधिक वैज्ञानिक, प्रभावी और पारदर्शी बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।
