पत्रकारिता पर खतरा या सिस्टम की कमी? सांसद ने उठाए सवाल.
Threat to journalism or a failure of the system? MP raises serious questions.

Special Correspondent, Narmadapurm, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, नई दिल्ली/नर्मदापुरम। लोकसभा में पत्रकारों की सुरक्षा और कल्याण को लेकर एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया। मध्य प्रदेश के होशंगाबाद-नरसिंहपुर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने शून्यकाल के दौरान केंद्र सरकार से पत्रकारों के लिए एक व्यापक “पत्रकार सुरक्षा एवं कल्याण नीति” बनाने की मांग की।
सांसद चौधरी ने पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए कहा कि पत्रकार केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच एक मजबूत सेतु हैं। वे सत्ता को जवाबदेह बनाते हैं और समाज को जागरूक करते हैं।
फील्ड रिपोर्टिंग में बढ़ते जोखिम
सांसद ने कहा कि फील्ड में कार्यरत पत्रकारों को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कार्यस्थल, घर और रिपोर्टिंग के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने केंद्र सरकार से पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए निम्न सुविधाएं देने की मांग की:
- जीवन एवं स्वास्थ्य बीमा
- बच्चों के लिए शिक्षा सहायता
- आवास या प्लॉट आवंटन
- रेल यात्रा में 50% रियायत की पुनर्बहाली
- राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर टोल में छूट
ईमानदार पत्रकारों का संरक्षण जरूरी
सांसद ने पत्रकारिता के नाम पर हो रहे दुरुपयोग पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ईमानदार और निष्पक्ष पत्रकारों का संरक्षण आवश्यक है, वहीं ब्लैकमेलिंग, अनैतिक गतिविधियों और फेक न्यूज में लिप्त लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने केंद्र सरकार से राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर एक पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था बनाने का आग्रह किया, ताकि पत्रकारिता की गरिमा बनी रहे और लोकतंत्र मजबूत हो।
“कलम सुरक्षित होगी तो लोकतंत्र मजबूत होगा”
अपने संबोधन में सांसद चौधरी ने कहा—
“जब कलम सुरक्षित होगी, तभी सच निर्भीक होकर सामने आएगा और लोकतंत्र मजबूत होगा।”
सांसद दर्शन सिंह चौधरी की इस पहल के बाद मीडिया जगत में नई बहस शुरू हो गई है।
अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाते हैं।