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नहरों पर कब्जा, सिस्टम खामोश: बालाघाट में जमीन ‘गायब’ होने का खेल!

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Encroachment on canals, system silent: The game of disappearing land in Balaghat!

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, बालाघाट। बालाघाट जिले में वैनगंगा सिंचाई परियोजना के अंतर्गत कृषकों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अंग्रेजों के समय, वर्ष 1917 में नहरों का निर्माण किया गया था।

आज स्थिति यह है कि विभागीय लापरवाही और कथित भू-माफिया की सांठगांठ के चलते इन ऐतिहासिक नहरों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। आरोप है कि नहरों की जमीन पर अवैध कब्जे कर रिहायशी और व्यावसायिक निर्माण कर लिए गए हैं।

कई स्थानों पर नहर की भूमि पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और दुकानें तक बना दी गई हैं। यह “नहर चोरी” का सिलसिला पिछले कई वर्षों से जारी है और अब भी थमने का नाम नहीं ले रहा है।

समय के साथ नहरों से सटी कृषि भूमि को प्लॉटिंग कर कॉलोनियों में बदल दिया गया। नगर पालिका द्वारा भी कथित रूप से नहर भूमि पर लीज देकर सड़कें और अन्य निर्माण करा दिए गए।

इस संबंध में तत्कालीन सांसद ढालसिंह बिसेन को अवगत कराया गया था। उन्होंने शासन को पत्र लिखकर बताया था कि सिंचाई विभाग द्वारा बनाई गई कई नहरें अब अनुपयोगी हो चुकी हैं और कई स्थानों पर उनका अस्तित्व ही समाप्त हो गया है।

उन्होंने सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि विलुप्त हो चुकी नहरों की जमीन का पता लगाकर उसे सुरक्षित किया जाए।

लेकिन अफसोस, इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिणामस्वरूप नहरों की भूमि पर अवैध कब्जा और निर्माण कार्य लगातार बढ़ते गए।

आज भी स्थिति यही है कि नहरों की जमीन पर कब्जे जारी हैं और विभाग द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।

सवाल उठता है—
क्या यह महज लापरवाही है?
या फिर विभाग और भू-माफिया के बीच मिलीभगत का परिणाम?

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