सरपंच से आशा कार्यकर्ता तक, जल मिशन को मजबूत करने एक मंच पर जुटे सभी.
From Sarpanch to ASHA workers, everyone came together on one platform to strengthen the Jal Mission.

Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, विदिशा, जल जीवन मिशन के तहत Madhya Pradesh Jal Nigam द्वारा संचालित ग्यारसपुर–मंडिया–बीना समूह जल प्रदाय योजना के अंतर्गत विकासखंड Vidisha में क्लस्टर स्तरीय एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला का उद्देश्य ग्राम स्तर पर जल आपूर्ति योजनाओं के संचालन, रख-रखाव और सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जनपद अध्यक्ष श्री वीर सिंह रहे, जबकि अध्यक्षता जनपद सीईओ श्री गगन वाजपेई ने की।
कार्यशाला का आयोजन क्रियान्वयन सहायक संस्था AV Technologies द्वारा किया गया।
शुभारंभ और सत्र
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती पूजन एवं माल्यार्पण के साथ की गई। इसके पश्चात रिसोर्स पर्सन श्री संतोष शर्मा द्वारा जल जीवन मिशन के अंतर्गत—
- परियोजना के संचालन एवं संधारण (O&M)
- ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के गठन की प्रक्रिया
- समिति की भूमिका और दायित्व
पर विस्तार से जानकारी दी गई।
दूषित पानी से होने वाले खतरों पर विशेष सत्र
परियोजना क्रियान्वयन इकाई Project Implementation Unit Bhopal से एस.क्यू.सी. मैनेजर श्रीमती सुनीता रोडगे ने दूषित पेयजल से होने वाली बीमारियों और शुद्ध पेयजल के लाभों पर विस्तार से जानकारी दी।
इसी क्रम में एसीएम श्रीमती इंदिरा अहिरवार ने भी परियोजना से जुड़े तकनीकी व सामुदायिक पहलुओं पर अपने विचार रखे।
पीएचई विभाग की भागीदारी
कार्यशाला में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) से श्रीमती रेनू ने भी सहभागिता की और जल आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े विभागीय अनुभव साझा किए।
बड़ी भागीदारी, ज़मीनी क्रियान्वयन पर फोकस
कार्यशाला में—
- क्लस्टर स्तर की ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं सचिव
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ता
- आशा कार्यकर्ता
- सम्मिलित ग्रामों की कम्युनिटी मोबिलाइज़र सुश्री रश्मि पंथी
सहित बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यशाला में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि जल जीवन मिशन को केवल योजना नहीं, बल्कि गांव-गांव तक पहुंचने वाला जनआंदोलन बनाया जाए, जिससे हर घर तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
यह आयोजन न केवल तकनीकी प्रशिक्षण तक सीमित रहा, बल्कि ग्राम स्तर पर जवाबदेही और सामुदायिक निगरानी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।