फ्री ट्रेड या फ्री कंट्रोल? आत्मनिर्भर भारत पर सवाल.
फ्री ट्रेड समझौते: विकास का अवसर या नियंत्रण का खतरा?
Free Trade or Free Control? Questions Raised Over Atmanirbhar Bharat.
Special Correspondent, Harishankar Parashar, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, भोपाल, भारत को कभी तलवारों ने नहीं हराया—भारत को हराया गया ‘व्यापार’ के बहाने।
आज 2026 की दहलीज़ पर खड़ा देश फिर उसी मोड़ पर दिखाई देता है, जहाँ कभी ईस्ट इंडिया कंपनी ने ‘ट्रेड लाइसेंस’ से सत्ता तक का सफर तय किया था।
तब जहांगीर ने व्यापार की छूट दी थी, आज सरकारें फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन कर रही हैं। फर्क सिर्फ इतना है—तब अंग्रेज थे, आज मल्टीनेशनल कॉर्पोरेट्स।
FTA: विकास का रास्ता या नियंत्रण की रणनीति?
UK, ओमान, न्यूजीलैंड और यूरोप के साथ हुए समझौतों को विकास का इंजन बताया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसान आज भी सड़कों पर है और नीति एयर-कंडीशन्ड कमरों में बन रही है।
सस्ते आयात से बाजार भरेगा, लेकिन क्या भारतीय किसान टिक पाएगा?
जब स्थानीय उत्पादन कमजोर होगा, तब कीमत कौन तय करेगा—किसान या कॉर्पोरेट?
इतिहास गवाह है
ईस्ट इंडिया कंपनी ने भी पहले व्यापार किया, फिर बाजार कब्जाए, फिर कर वसूले और आखिर में सत्ता हथिया ली।
आज FTA के जरिए क्या वही आर्थिक निर्भरता पैदा नहीं की जा रही?
सबसे बड़ा सवाल
अगर किसान कमजोर हुआ, तो देश मजबूत कैसे रहेगा?
क्या यह आत्मनिर्भर भारत है या आत्मसमर्पण भारत?
अब भी वक्त है
इतिहास चेतावनी देता है—
व्यापार अगर देशहित से बाहर गया, तो गुलामी दोबारा दरवाज़ा खटखटाती है।