दुकानें बनीं, पेड़ कटे, शिकायतें दबीं — वारासिवनी में सिस्टम की खुली पोल.
Shops built, trees felled, complaints buried — the system’s failures exposed in Waraseoni.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट, जिले के वारासिवनी अनुविभागीय मुख्यालय में इन दिनों अराजकता जैसे हालात बन चुके हैं। नगर पालिका नजूल एवं शासकीय नजूल भूमि पर भू-माफियाओं द्वारा खुलेआम कब्जा कर बिना किसी वैध अनुमति के बहुमंजिला दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है।
सबसे गंभीर बात यह है कि शासकीय नजूल भूमि पर दुकानें बनाकर उन्हें बेचने और किराये पर देने का संगठित खेल चल रहा है, जिससे लाखों रुपये की अवैध कमाई की जा रही है। स्थानीय नागरिकों द्वारा लिखित शिकायतें और सीएम हेल्पलाइन में दर्ज प्रकरण भी अब तक सिर्फ कागजी औपचारिकता बनकर रह गए हैं।
नजूल विभाग के सर्वे में ही 300 से अधिक अवैध कब्जे सामने आ चुके हैं, जबकि 100 से ज्यादा ऐसे प्रकरण हैं जिनका अब तक विधिवत निर्धारण नहीं हुआ है। कई मामलों में जिन व्यक्तियों के नाम पर कब्जा दर्शाया गया है, वास्तव में वहां किसी और का अवैध अधिपत्य बना हुआ है।
शहर के मुख्य मार्गों सहित अन्य सड़कों पर लगे वर्षों पुराने पेड़ों की अवैध कटाई भी धड़ल्ले से की जा रही है। ताजा मामला मुख्य मार्ग पर बिना अनुमति तीन मंजिला दुकान निर्माण और उसके सामने लगे पुराने पेड़ की कटाई से जुड़ा है।
मुख्य नगर पालिका अधिकारी को शिकायत देने के बावजूद केवल नोटिस जारी कर खानापूर्ति कर दी गई।
इन हालातों से यह सवाल सीधे खड़ा होता है—
क्या राजस्व महकमा और नगर पालिका परिषद अवैध कब्जों व निर्माणों को खुला संरक्षण दे रही है?
अगर नहीं, तो वर्षों से चल रहे इस अवैध साम्राज्य पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?