UGC पर सवर्ण समाज का विस्फोट: विदिशा में मंत्री का काफिला रोका, गुना में पुतला दहन.
UGC कानून के खिलाफ विदिशा और गुना में सवर्ण समाज का जोरदार विरोध प्रदर्शन
Savarna Community Erupts Over UGC Law: Minister’s Convoy Stopped in Vidisha, Effigy Burnt in Guna.
Special Correspondent, Richa Tiwari, Guna/Vidisha, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, विदिशा/गुना। यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ मध्यप्रदेश में सवर्ण समाज का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा है। विदिशा में जहां राष्ट्रीय राजपूत करणी सेवा ने प्रदेश सरकार के मंत्री तुलसी सिलावट के काफिले को रोककर खुला विरोध दर्ज कराया, वहीं गुना में सवर्ण समाज और सवर्ण आर्मी के नेतृत्व में उग्र प्रदर्शन, नारेबाजी और पुतला दहन किया गया।
विदिशा में मंत्री का काफिला रोका, कानून वापस लेने की मांग
प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट भोपाल से कुरवाई कोटा बैराज के निरीक्षण के लिए जा रहे थे। इसी दौरान विदिशा के विवेकानंद चौराहे पर राष्ट्रीय राजपूत करणी सेवा के कार्यकर्ताओं ने उनका काफिला रोक लिया। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी कानून को सवर्ण समाज के खिलाफ एकतरफा और भेदभावपूर्ण बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की।
राष्ट्रीय राजपूत करणी सेवा के अतुल तिवारी ने कहा कि यह कानून समाज को बांटने वाला है और सामान्य वर्ग के हितों के खिलाफ है। मंत्री तुलसी सिलावट ने प्रतिनिधिमंडल की बात सुनी और विषय को उचित मंच पर रखने का आश्वासन दिया, लेकिन इससे प्रदर्शनकारियों का आक्रोश शांत नहीं हुआ।
कलेक्ट्रेट तक रैली, राष्ट्रपति–प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन
करणी सेना, राजपूत समाज और सवर्ण समाज के कार्यकर्ताओं ने यूजीसी के नए नियमों के विरोध में कलेक्ट्रेट तक विशाल रैली निकाली। यहां राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह कानून सामान्य वर्ग, ओबीसी और एससी-एसटी वर्ग के बीच अविश्वास और टकराव बढ़ाने वाला है।
प्रदर्शनकारी बविता सिंह ने कहा,
“इस कानून से सवर्ण समाज के बच्चों का भविष्य खतरे में है। हम इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेंगे।”
गुना में उग्र प्रदर्शन, UGC का पुतला दहन
इधर गुना में भी सवर्ण समाज का गुस्सा चरम पर नजर आया। सवर्ण आर्मी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में युवा, छात्र और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि हनुमान चौराहे पर एकत्रित हुए। यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और पुतला दहन किया गया।
प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर “UGC 2026 काला कानून है”, “समानता के नाम पर भेदभाव बंद करो” जैसे नारे लिखे थे। इसके बाद रैली के रूप में सभी कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।
अनुच्छेद 14 का हवाला, तीन बड़े संशोधनों की मांग
सवर्ण आर्मी के जिला अध्यक्ष विक्रम सिंह तोमर के नेतृत्व में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया कि यूजीसी के नए नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के विपरीत हैं और शैक्षणिक संस्थानों में सवर्ण छात्रों को संदेह की नजर से देखने का माहौल बना रहे हैं।
सवर्ण आर्मी ने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं—
1️⃣ झूठी शिकायतों पर दंड: दुर्भावनापूर्ण शिकायत करने वालों पर भी समान कानूनी कार्रवाई हो।
2️⃣ समितियों में संतुलित प्रतिनिधित्व: कॉलेजों की शिकायत निवारण समितियों में सवर्ण समाज से कम से कम दो सदस्यों की अनिवार्य नियुक्ति हो।
3️⃣ सवर्ण छात्रों को विधिक संरक्षण: जातिगत अपमान या भेदभाव के मामलों में सवर्ण छात्रों को भी कानूनी सुरक्षा दी जाए।
“कानून के विरोधी नहीं, अन्याय के विरोधी हैं”
विक्रम सिंह तोमर ने कहा,
“हम कानून के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसी एक वर्ग को संरक्षण देने के नाम पर दूसरे वर्ग को जन्मजात अपराधी मान लेना न्याय नहीं है। यदि हमारी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन सड़क से संसद तक जाएगा।”
इस प्रदर्शन में सवर्ण समाज के कई गणमान्य नागरिक, छात्र और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे।