आपदा में भी भ्रष्टाचार — दफ्तर के भीतर से चला लाखों का खेल.
Corruption even during disaster — a racket worth lakhs operated from inside the office.

Special Correspondent, Richa Tiwari, Sehore, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, सीहोर, मामला Sehore जिले की Ichhawar तहसील से सामने आया है, जहां तहसील कार्यालय में पदस्थ एक बाबू ने किसानों को मिलने वाली राहत राशि खुद और अपने सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर कर दी।
जांच के बाद कलेक्टर Balaguru K. ने सख्त कार्रवाई करते हुए इछावर तहसील कार्यालय में पदस्थ सहायक वर्ग–03 (लिपिक) सुशील कुमार रायकवार को शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभागीय जांच में कुल ₹63,58,894 के दुरुपयोग की पुष्टि हुई है।
कूटरचित दस्तावेजों से किया गया खेल
जांच प्रतिवेदन के अनुसार आरोपी कर्मचारी ने कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लेकर शासन से जारी आपदा राहत राशि का अवैध हस्तांतरण अपने तथा अन्य सहयोगियों के बैंक खातों में किया। जांच में यह भी सामने आया कि राहत के नाम पर मिली धनराशि को नियमों को ताक पर रखकर अलग-अलग खातों में डाला गया, जिससे शासन को गंभीर आर्थिक नुकसान पहुंचा।
नियमों के तहत हुई सीधी बर्खास्तगी
विभागीय जांच अधिकारी की रिपोर्ट में सभी आरोप पूरी तरह प्रमाणित पाए गए। इसके बाद मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत कड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी बाबू को तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक कर दिया गया।
अब होगी पूरी रकम की वसूली
जारी आदेश के अनुसार सुशील कुमार रायकवार से दुरुपयोग की गई ₹63,58,894 की पूरी राशि की वसूली की जाएगी। निर्धारित समय सीमा में रकम जमा नहीं होने की स्थिति में प्रशासन द्वारा वैधानिक वसूली की कार्रवाई की जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पीड़ित किसान और गरीब राहत के लिए दफ्तरों के चक्कर काटते रहे, तब सिस्टम के भीतर बैठे लोग उनकी मदद की रकम को निजी खातों में कैसे पहुंचाते रहे—और क्या ऐसे मामलों में सिर्फ एक बाबू पर कार्रवाई कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाएगा?