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फाइलें पूरी, बच्चे अधूरे इलाज पर – NRC में ‘खानापूर्ति मॉडल’ उजागर.

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Files are complete, but children remain under-treated – the “tick-box model” exposed at the NRC.

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, कटनी। रीठी स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में कुपोषित बच्चों के इलाज की सच्चाई अब सिस्टम के दावों की पोल खोल रही है। सरकारी रिकॉर्ड में यह केंद्र गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को 24 घंटे इलाज और पोषण देने वाला मॉडल सेंटर बताया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।

सूत्रों के मुताबिक कई गंभीर कुपोषित बच्चों को समय पर भर्ती तक नहीं किया जा रहा। जिन बच्चों को भर्ती किया जाता है, उनके इलाज, पोषण और निगरानी में भारी लापरवाही बरती जा रही है। यही वजह है कि आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में कुपोषण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन व्यवस्थाओं के आधार पर बच्चों की जान बचाई जानी चाहिए, वही व्यवस्थाएं केवल कागज़ों में पूरी दिखाई जा रही हैं।
दैनिक वजन जांच, विशेष पोषण आहार, माताओं को प्रशिक्षण और फॉलो-अप — सब कुछ रिकॉर्ड में दर्ज है, लेकिन मौके पर इनका असर दिखाई नहीं देता।

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यहां इलाज से ज्यादा “फाइलों का इलाज” किया जाता है। लंबे-चौड़े बिल और रिपोर्ट तो बन जाते हैं, लेकिन बच्चों की हालत में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आता।

स्थिति यह है कि जिन केंद्रों को कुपोषण से लड़ने की सबसे बड़ी ढाल माना जाता है, वही केंद्र आज खुद सवालों के घेरे में आ चुके हैं।

सबसे गंभीर पहलू यह है कि इस पूरे मामले को लेकर प्रभारी जनपद अध्यक्ष प्रकाश साहू द्वारा जनसुनवाई में शिकायत भी दी जा चुकी है, लेकिन एक महीने बाद भी फाइलें दफ्तरों में धूल फांक रही हैं।

अब बड़ा सवाल यह है—
क्या रीठी का पोषण पुनर्वास केंद्र बच्चों को जीवन देने के लिए बना है या सिर्फ सरकारी योजनाओं की खानापूर्ति के लिए?

और उससे भी बड़ा सवाल—
कटनी जिले में कुपोषण से जूझते बच्चों की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?

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