महिला विकास के नाम पर मज़ाक! रीठी कार्यालय में स्वच्छता भी गायब, पोषण भी.
Mockery in the Name of Women’s Development! Cleanliness Missing, Nutrition Neglected at Reethi Office.
Mohan Nayak, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.
Despite massive spending under the Swachh Bharat Abhiyan, the Reethi Women and Child Development Office paints a grim picture — garbage at the gate, unsafe conditions for women, irregular nutrition supply, and no community outreach. Officials remain indifferent while funds vanish into mismanagement.
MP संवाद, कटनी, स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छता के नाम पर हर बार करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। रैलियों और कार्यक्रमों में विशेषज्ञों की भी सहभागिता रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग की भूमिका भी अहम रही है। लेकिन यह क्या…? जो विभाग स्वच्छता का संदेश देता है, वही रीठी महिला बाल विकास परियोजना कार्यालय खुद गंदगी में डूबा है।
बारिश के मौसम में चारों तरफ गंदगी और कीट-पतंगों का आतंक बना रहता है, जिससे कार्यालय आने वाली महिलाएं और कर्मचारी असुविधा का शिकार हो रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि ऑफिस में डस्टबिन तक की व्यवस्था नहीं है। चाय पीने के बाद डिस्पोजल कप दरवाजे के सामने ही फेंक दिए जाते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अधिकांश आंगनवाड़ी केंद्र तय समय पर नहीं खुलते और कई बार समय से पहले बंद कर दिए जाते हैं। बताया जा रहा है कि कर्मचारी पहले अपने घरेलू काम निपटाते हैं, फिर केंद्र आते हैं। बैलवाड़ी में एग्रीमेंट वाली आंगनवाड़ी में बच्चों की संख्या घट रही है और बच्चों के साथ-साथ गर्भवती व धात्री महिलाओं को पोषण आहार भी समय पर नहीं मिल रहा है।
कार्यालय में बैठकें भी नहीं होतीं, जिससे महिलाओं तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने में भी चूक हो रही है। अगर ऑफिस और उसके आस-पास की स्थिति इतनी खराब है, तो क्षेत्र के आंगनवाड़ियों की हालत क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
प्रभारी परियोजना अधिकारी को इन बातों की कोई परवाह नहीं है। वह कार्यालय में उपस्थित रहने की बजाय सिर्फ कागज़ी कार्रवाई पूरी कर लेते हैं। जबकि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा इन योजनाओं के लिए पर्याप्त अनुदान राशि भी दी जाती है।
अब देखना होगा कि इस पर उच्च अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं।