मौत का सर्टिफिकेट बना एटीएम, PM जीवन ज्योति योजना लुटी.
PM जीवन ज्योति बीमा योजना में फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्रों से क्लेम निकालने का खुलासा, EOW जांच में बड़ा घोटाला सामने आया।
Death certificates turned into ATMs, PM Jeevan Jyoti Insurance Scheme looted.
Special Correspondent, Amit Singh, Gwalior, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, ग्वालियर, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) में ग्वालियर–चंबल संभाग से ऐसा घोटाला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
EOW की जांच में खुलासा हुआ है कि एक संगठित गिरोह ने जिंदा लोगों को कागजों में मृत दिखाकर बीमा कंपनियों से लाखों रुपये हड़प लिए। हैरानी की बात यह है कि इस खेल में ग्वालियर नगर निगम की जन्म–मृत्यु शाखा के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि बैंककर्मी भी शामिल पाए गए।
फर्जी मौतों का फैक्ट्री मॉडल
श्योपुर जिले में ही 50 से अधिक संदिग्ध क्लेम सामने आए। जांच किए गए 6 मामलों में से 5 पूरी तरह फर्जी निकले। यानी जिन लोगों की “मौत” दिखाई गई, वे हकीकत में जिंदा थे—लेकिन कागजों में उन्हें दफना दिया गया।
नगर निगम से बैंक तक फैला नेटवर्क
फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र, बैंक खातों की सेटिंग और बीमा क्लेम की मंजूरी—पूरा तंत्र योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा था। यह सिर्फ धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सरकारी भरोसे की हत्या है।
कई बीमा कंपनियां घेरे में
एलआईसी से लेकर एसबीआई लाइफ, एक्सिस मैक्स, स्टार यूनियन दाइची जैसी 8 बड़ी बीमा कंपनियों के क्लेम जांच में हैं। इससे साफ है कि घोटाला किसी एक जिले या संस्था तक सीमित नहीं।
सवाल सिस्टम से
• क्या बिना मौत के मृत्यु प्रमाणपत्र बनना इतना आसान है?
• क्या बैंकों की जांच सिर्फ कागजों तक सीमित है?
• क्या गरीबों के नाम पर बनी योजनाएं भ्रष्टाचारियों की एटीएम बन चुकी हैं?
PM जीवन ज्योति बीमा योजना जैसी सामाजिक सुरक्षा योजना में यह फर्जीवाड़ा केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों और प्रशासनिक निगरानी पर करारा तमाचा है।
अब देखना यह है कि कार्रवाई सिर्फ निचले कर्मचारियों तक सीमित रहती है या इस पूरे नेटवर्क के असली मास्टरमाइंड भी कानून के शिकंजे में आते हैं।