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टंकी खड़ी, पाइपलाइन बिछी… फिर भी प्यासा गांव, कौन जिम्मेदार?

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The tank is standing, pipelines are laid… yet the village is still thirsty — who is responsible?

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, कटनी। गर्मी आते ही बहोरीबंद तहसील के ग्राम पंचायत पटोरी में करोड़ों रुपये से बनी नल-जल योजना की असलियत सामने आ गई है। कागज़ों में “हर घर नल से जल” की तस्वीर दिखाने वाली यह योजना जमीन पर पूरी तरह दम तोड़ चुकी है।

करीब 1200 की आबादी वाले इस गांव में हालात ऐसे हैं कि महिलाएं खाली डिब्बे और गुम्मे लेकर पंचायत भवन पहुंचीं और अधिकारियों के सामने धरने पर बैठ गईं। सवाल सीधा है—
जब टंकी बन चुकी है, बोर हो चुके हैं और पाइपलाइन घर-घर बिछा दी गई है, तो पानी आखिर गया कहां?

ग्रामीणों का आरोप है कि 1.27 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली इस योजना में न तो पूरा काम हुआ और न ही स्थायी जल स्रोत की सही व्यवस्था की गई। जिन बोरों से टंकी भरनी थी, उनमें शुरू से ही पर्याप्त पानी नहीं था, इसके बावजूद योजना को एनओसी देकर “पूरा” घोषित कर दिया गया।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि ठेकेदार द्वारा हर घर से 500 रुपये की वसूली भी की गई, लेकिन बदले में गांव को सिर्फ तीन-चार दिन पानी मिला और फिर सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई।

धरने के दौरान सरपंच और सचिव असहज नजर आए। समझाइश दी गई, लेकिन महिलाओं का साफ कहना था—
अब आश्वासन नहीं, पानी चाहिए।

ग्रामीणों का सवाल यह भी है कि—
क्या बिना पानी के स्रोत सुनिश्चित किए करोड़ों की योजना पास कर देना ही अब सिस्टम की नई परिभाषा बन गई है?

आज स्थिति यह है कि पटोरी के लोग निजी बोरिंग, कुओं और कई किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं, जबकि गांव में खड़ी पानी की टंकी खुद सरकारी लापरवाही की गवाही दे रही है।

ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर स्थायी समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

अब बड़ा सवाल यही है—
कटनी जिले में क्या नल-जल योजनाएं केवल भुगतान और फाइलों तक ही सीमित रह गई हैं?

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