जब पानी बना ज़हर: इंदौर के बाद पूरे MP पर NGT का बड़ा एक्शन.
Indore tragedy prompts NGT to crack down on contaminated drinking water across Madhya Pradesh
When Water Turned Toxic: After Indore, NGT Takes Major Action Across Madhya Pradesh.
Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद, भोपाल/इंदौर। मध्यप्रदेश के शहरों में सीवेज-मिश्रित और दूषित पेयजल की आपूर्ति को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए “गंभीर खतरा” बताते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की केंद्रीय क्षेत्र पीठ ने गुरुवार को बड़ा और सख्त कदम उठाया है। इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई 20 मौतों के बाद एनजीटी ने पूरे प्रदेश में इस समस्या की जांच के लिए 6 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति के गठन का आदेश दिया है।
यह आदेश हरित कार्यकर्ता कमल कुमार राठी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किया गया। एनजीटी ने स्पष्ट किया कि यदि पेयजल आपूर्ति में सीवेज की मिलावट पाई जाती है, तो यह सीधे तौर पर नागरिकों के संविधान प्रदत्त जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन है।
भोपाल के तालाबों में ‘डेंजर लेवल’ पर मल बैक्टीरिया
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता ने एनजीटी को बताया कि भोपाल के प्रमुख तालाबों में मल बैक्टीरिया की मात्रा 1600 यूनिट प्रति मिलीलीटर तक पहुंच चुकी है, जो अत्यंत खतरनाक है।
सीवेज लाइनें पेयजल पाइपलाइनों को दूषित कर रही हैं, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
NGT की सख्ती: छह सप्ताह में रिपोर्ट देगी समिति
एनजीटी के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमीनी हालात की जांच के लिए छह सदस्यीय समिति गठित की है।
यह समिति छह सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
सभी कलेक्टरों और नगर आयुक्तों को भेजे जाएंगे आदेश
एनजीटी ने निर्देश दिया है कि आदेश की प्रति प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और नगर आयुक्तों को भेजी जाए, ताकि निर्देशों का तत्काल और प्रभावी पालन सुनिश्चित हो सके।
पीठ ने यह भी माना कि इंदौर की घटना केवल एक शहर की समस्या नहीं, बल्कि पूरे राज्य में प्रणालीगत विफलता की ओर इशारा करती है।
जांच समिति में कौन-कौन शामिल
छह सदस्यीय समिति में शामिल हैं—
- IIT इंदौर के निदेशक द्वारा नामित एक विशेषज्ञ
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), भोपाल का प्रतिनिधि
- राज्य पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव
- शहरी प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रधान सचिव
- जल संसाधन विभाग का प्रतिनिधि
- मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) – नोडल एजेंसी
राज्यभर में शुद्ध पेयजल सुनिश्चित करने के निर्देश
एनजीटी ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि
- पेयजल गुणवत्ता की नियमित रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
- आपूर्ति समय और स्रोत की पारदर्शी जानकारी दी जाए
- शिकायत निवारण के लिए मजबूत MIS सिस्टम और मोबाइल ऐप विकसित किया जाए