नरसिंहपुर में सियासी संग्राम: हमले के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव.
Political Battle in Narsinghpur: Tensions Rise After the Attack

Special Correspondent, Ranjeet Singh Tomar, Narsinghpur MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, नरसिंहपुर (गाडरवारा) |भाजपा नेता पवन पटेल पर हुए कथित जानलेवा हमले का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। आरोपियों की गिरफ्तारी में हो रही देरी ने जिले की राजनीति को गरमा दिया है।
कांग्रेस और किसान संगठनों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कड़ा रुख अपनाया है।
जिला कांग्रेस कमेटी नरसिंहपुर की अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक सुनीता पटेल ने पुलिस प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि तय समय सीमा में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव कर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
ज्ञापन में उठे गंभीर सवाल
सुनीता पटेल ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे ज्ञापन में कहा कि गाडरवारा निवासी भाजपा नेता पवन पटेल पर बीते दिनों कथित रूप से रेत माफियाओं द्वारा प्राणघातक हमला किया गया।
इसके बावजूद मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं होना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि इस देरी से आम जनता में भय, रोष और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
24 घंटे का अल्टीमेटम
कांग्रेस ने साफ कर दिया है:
👉 24 घंटे में गिरफ्तारी
👉 अन्यथा SP कार्यालय का घेराव
👉 बड़े स्तर पर आंदोलन
भाजपा नेताओं की चुप्पी पर सवाल
सुनीता पटेल ने इस मामले में भाजपा नेताओं की चुप्पी पर भी तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा:
- अब तक किसी विधायक, मंत्री या बड़े भाजपा नेता का बयान नहीं
- न ही सोशल मीडिया पर समर्थन
👉 “यह चुप्पी संकेत देती है कि प्रशासन पर दबाव है और कथित माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है।”
उन्होंने इसे कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल बताया।
किसान संगठनों की एंट्री, आंदोलन की चेतावनी
इस मामले में राष्ट्रवादी किसान आर्मी के जिला अध्यक्ष प्रतीक शर्मा ने भी कांग्रेस के अल्टीमेटम का समर्थन किया।
उन्होंने कहा:
👉 पवन पटेल किसानों और जनहित के मुद्दों को उठाते रहे हैं
👉 उन पर हमला पूरे किसान समाज पर हमला है
उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो किसान संगठन भी व्यापक आंदोलन करेंगे।
जिले में बढ़ा सियासी तापमान
इस पूरे घटनाक्रम के बाद नरसिंहपुर जिले का राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।
👉 एक तरफ कांग्रेस का अल्टीमेटम
👉 दूसरी तरफ किसान संगठनों का समर्थन
👉 और प्रशासन की धीमी कार्रवाई
इन सबने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
कार्रवाई या सिर्फ इंतजार?
अब नजरें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं—
क्या 24 घंटे में आरोपियों की गिरफ्तारी होगी?
या फिर यह मामला आंदोलन और राजनीतिक टकराव में बदल जाएगा?