दूसरे राज्यों में कानून, मध्य प्रदेश में सिर्फ फाइलें! क्यों अटका पत्रकार सुरक्षा बिल?
Law in other states, only files in Madhya Pradesh — why is the Journalist Protection Bill still stalled?

Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, भोपाल। मध्य प्रदेश में आज पत्रकार सबसे ज्यादा असुरक्षित महसूस कर रहा है—हमले, धमकियां, झूठे मुकदमे और आर्थिक दबाव अब सामान्य होते जा रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि वर्षों से उठ रही पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग अब भी फाइलों से बाहर नहीं आ सकी है।
सरकारी बैठकों, समितियों और आश्वासनों के बीच जमीन पर काम करने वाले पत्रकार आज भी उसी खतरे में खड़े हैं, जहां न सुरक्षा की गारंटी है और न सम्मान की ठोस व्यवस्था।
इसी माहौल में जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया के मध्य प्रदेश संयोजक हरिशंकर पराशर लगातार इस लड़ाई को जिंदा रखे हुए हैं। कटनी से उठी उनकी आवाज अब प्रदेशभर के पत्रकारों की सामूहिक मांग बन चुकी है।
प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पत्रकार संगठनों ने रैलियां कीं, ज्ञापन सौंपे और सरकार से सीधा सवाल किया—
जब दूसरे राज्यों में कानून बन चुका है, तो मध्य प्रदेश क्यों पीछे है?
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि सरकार द्वारा गठित समिति को ढाई साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज तक न रिपोर्ट सामने आई और न ही कोई मसौदा सार्वजनिक हुआ।
विधानसभा में सवाल भी उठा, जवाब भी मिला— लेकिन तारीख नहीं मिली।
पत्रकार संगठनों का साफ कहना है कि बिना मजबूत कानून के न तो हमले रुकेंगे और न ही सच लिखने का हौसला बचेगा।
आज हालात यह हैं कि खबर लिखना पत्रकार का पेशा नहीं, जोखिम बन चुका है।
हरिशंकर पराशर और प्रदेश के सक्रिय पत्रकार लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि—
क्या लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को सुरक्षित किए बिना मजबूत लोकतंत्र की कल्पना की जा सकती है?
सरकार से पत्रकारों की सीधी अपील है—
अब अध्ययन नहीं, निर्णय चाहिए।
अब समिति नहीं, कानून चाहिए।
क्योंकि
पत्रकार सुरक्षा कानून सिर्फ पत्रकारों का मुद्दा नहीं, लोकतंत्र की सुरक्षा का सवाल है।