कर्ज बढ़ा, खर्च घटा या विकास तेज? एमपी बजट 2026-27 पर बड़ा विश्लेषण.
Has Debt Increased, Spending Reduced, or Development Accelerated? A Big Analysis of the MP Budget 2026–27.

Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.
मध्यप्रदेश का वर्ष 2026-27 का बजट राज्य की विकास यात्रा को नई दिशा देने वाला दस्तावेज़ माना जा रहा है।
लगभग 3.90 लाख करोड़ रुपये के आकार वाला यह बजट केवल आय-व्यय का विवरण नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और आर्थिक दूरदर्शिता के संतुलन का स्पष्ट संकेत देता है।
खास बात यह है कि सरकार ने कोई नया कर लगाए बिना विकास योजनाओं के विस्तार का दावा किया है, जिसे आम नागरिकों के प्रति अपेक्षाकृत संवेदनशील दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।
निकाय चुनावों से पहले घोषित 11,600 करोड़ रुपये के विकास प्रोजेक्ट्स को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखें तो यह शहरी और ग्रामीण अधोसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ठोस पहल प्रतीत होती है।
सड़क, जलापूर्ति, नगरीय सुविधाओं और स्थानीय विकास कार्यों में निवेश से न केवल नागरिक सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिल सकती है।
हालांकि राज्य का कुल सार्वजनिक ऋण लगभग 6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, लेकिन सरकार का तर्क है कि ऋण-से-जीडीपी अनुपात 32 से 33 प्रतिशत के दायरे में नियंत्रित रखा गया है।
साथ ही राजकोषीय घाटे को भी तय सीमा के भीतर रखने का लक्ष्य रखा गया है, जो वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के प्रयास को दर्शाता है।
सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) योजनाओं के लिए लगभग 43 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान राज्य की जनकल्याणकारी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
महिलाओं, किसानों, युवाओं और कमजोर वर्गों के लिए संचालित योजनाएं सामाजिक समावेशन को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही हैं।
विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रय-शक्ति बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।
रोजगार के मोर्चे पर सरकार ने लगभग 1.60 लाख पदों पर भर्ती की घोषणा की है, जिसे युवाओं के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
साथ ही पूंजीगत व्यय में वृद्धि और अधोसंरचना निवेश से निजी क्षेत्र में भी रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना जताई जा रही है।
औद्योगिक विकास, कौशल उन्नयन और निवेश प्रोत्साहन से जुड़ी नीतियों को राज्य की दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती का आधार बनाने का प्रयास भी इस बजट में दिखाई देता है।
ब्याज भुगतान और ऋण प्रबंधन के दबाव के बीच विकास कार्यों को गति देना किसी भी राज्य सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।
इस दृष्टि से यह बजट सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक विकास के बीच संतुलन साधने का प्रयास करता नजर आता है।
समग्र रूप से देखें तो वर्ष 2026-27 का बजट स्थिरता, भरोसे और विकास की दिशा में एक अहम कदम माना जा सकता है।
अब असली परीक्षा इस बात की होगी कि घोषित योजनाएं जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू हो पाती हैं।
विश्लेषण – डॉ. अमित ठाकुर, बजट एवं प्रबंधन विशेषज्ञ)