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हवाला कांड में पुलिस की ‘लीपापोती’ उजागर, कटनी केस में सभी आरोपी बाइज्जत बरी.

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Court exposes police cover-up in Katni hawala scam case

Court acquits all accused in Katni hawala case citing police investigation lapses

Police ‘Cover-Up’ Exposed in Hawala Scam, All Accused Acquitted with Honour in Katni Case.

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Katni, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, कटनी। कटनी के चर्चित करोड़ों रुपये के कथित हवाला कांड में अदालत का फैसला सिर्फ आरोपियों की रिहाई नहीं है, बल्कि पुलिस विवेचना पर सीधा तमाचा है।

तृतीय अपर सत्र न्यायालय, जबलपुर ने साफ शब्दों में कहा है कि यह पूरा प्रकरण पुलिस की “घोर उपेक्षा और लापरवाही” का जीवंत उदाहरण है। अदालत ने विवेचना की कमजोरियों के कारण सभी आठ आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया।

16 फर्जी फर्म और करोड़ों का खेल… लेकिन सबूत शून्य

मामले में आरोप था कि कटनी में 16 फर्जी व्यापारिक फर्में बनाकर एक्सिस, एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंकों में खाते खोले गए और उनके माध्यम से करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया।

लेकिन अदालत में यही सवाल सबसे बड़ा बनकर उभरा—
अगर लेन-देन इतना बड़ा था, तो ठोस सबूत कहां हैं?

जांच की सबसे बड़ी चूक—हस्ताक्षर और दस्तावेजों की जांच ही नहीं

कोर्ट ने अपने फैसले में बेहद गंभीर बात दर्ज की कि—

  • किसी भी आरोपी के हस्ताक्षर या हस्तलिपि की जांच एक्सपर्ट से नहीं कराई गई
  • जब्त दस्तावेजों की विधिवत फॉरेंसिक जांच नहीं हुई
  • यहां तक कि जिन दस्तावेजों को साक्ष्य मिटाने से जोड़ा गया, वही दस्तावेज बाद में आरोपियों को लौटा दिए गए

साक्ष्य मिटाने का आरोप भी हवा में

जिस मामले में साक्ष्य विलोपन का आरोप लगाया गया था, उसी मामले में अदालत ने कहा कि पुलिस यह भी साबित नहीं कर सकी कि वास्तव में साक्ष्य नष्ट किए गए।

यहां तक कि जब्त कागजात पुलिस की पेन-ड्राइव में भी मौजूद नहीं पाए गए।

56 गवाह… और एक-एक कर पलट गए

अभियोजन के 56 गवाह अदालत में एक-एक कर अपने ही बयानों से मुकरते चले गए।
फरियादियों ने भी स्वीकार किया कि बैंक दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर थे।

यही नहीं, बैंक कर्मचारियों के बयान भी आरोपियों के खिलाफ लेन-देन को ठोस रूप से साबित नहीं कर सके।

कोर्ट की तल्ख टिप्पणी—न्याय प्रशासन के लिए घातक

अदालत ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि—

“इस प्रकार के महत्वपूर्ण अपराधों में थाना प्रभारियों का ऐसा शिथिल और लापरवाह आचरण न्याय प्रशासन के लिए घातक है।”

बड़ा सवाल अब भी कायम

जब 16 फर्में बनीं, करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ और दस्तावेज जब्त हुए—
तो फिर सच्चाई अदालत तक पहुंचने से पहले रास्ते में कहां गुम हो गई?

कटनी का यह मामला अब सिर्फ हवाला कांड नहीं,
बल्कि पुलिस जांच की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल बन चुका है।

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