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मानसिक हालत का बहाना, सिस्टम की नाकामी — कटनी जिला अस्पताल फिर कटघरे में.

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Mental condition” as an excuse, system failure — Katni District Hospital in the dock again.

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, कटनी। जिला अस्पताल की संवेदनशीलता और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल के जनरल वार्ड में भर्ती एक घायल महिला मरीज को ठंड से बचाने के लिए कंबल की बजाय खाली प्लास्टिक की बोरियां ओढ़कर सोते हुए पाया गया।

जानकारी के अनुसार, उक्त महिला 6 फरवरी को कोतवाली थाना क्षेत्र के सामने एक अज्ञात वाहन की टक्कर से गंभीर रूप से घायल हो गई थी। सड़क दुर्घटना में महिला के दोनों पैरों में गंभीर चोटें आई थीं। राहगीरों की मदद से उसे कटनी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां बीते कई दिनों से उसका इलाज जनरल वार्ड में चल रहा है।

इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें महिला मरीज अस्पताल के बिस्तर पर प्लास्टिक की बोरियों में लिपटी हुई दिखाई दे रही है। वीडियो सामने आते ही जिला अस्पताल की मूलभूत सुविधाओं और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है।

कंबल था, लेकिन व्यवस्था नहीं?

मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने सफाई पेश की है। नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। महिला अपना नाम और पता नहीं बता पा रही थी। स्टाफ के अनुसार अस्पताल की ओर से उसे कंबल उपलब्ध कराया गया था, लेकिन उसने कंबल फेंक दिया, जिसके बाद पास में पड़ी खाली प्लास्टिक बोरियों को ओढ़ लिया।

लेकिन यह सफाई खुद स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही को उजागर करती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी, तो उसकी विशेष निगरानी, देखरेख और सुरक्षा की जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की थी। एक गंभीर रूप से घायल महिला मरीज को इस हाल में छोड़ देना यह दर्शाता है कि जिला अस्पताल में मरीज नहीं, केवल औपचारिक इलाज हो रहा है।

सवाल यह नहीं कि कंबल था या नहीं, सवाल यह है कि देखरेख कहां थी?

मानसिक रूप से अस्वस्थ और सड़क दुर्घटना में घायल महिला को प्लास्टिक की बोरी ओढ़कर सोते रहने देना सीधे तौर पर अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता और लचर निगरानी व्यवस्था को उजागर करता है।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि कागजों में भले ही जिला अस्पताल को बेहतर सुविधाओं वाला बताया जाता हो, लेकिन जमीनी हकीकत मरीजों के लिए आज भी बेहद अपमानजनक और असुरक्षित बनी हुई है।

सिविल सर्जन का पक्ष

इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. यशवंत वर्मा ने कहा—

“वह महिला बेसहारा है और जालपा देवी क्षेत्र में मांगकर गुजारा करती है। अस्पताल आने पर उसे कंबल दिया गया था। महिला को किसी प्रकार की समस्या नहीं है और उसकी व्यवस्था कराई गई है।”

हालांकि, सवाल अब भी कायम है कि यदि महिला बेसहारा और मानसिक रूप से अस्वस्थ थी, तो उसे प्लास्टिक की बोरी ओढ़े हुए हालत में छोड़ देना किस तरह की ‘व्यवस्था’ को दर्शाता है?

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