हर कोई पत्रकार? सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल.
Everyone a Journalist? Serious Questions Raised on the System.

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, इंदौर | डिजिटल युग में सूचना का प्रवाह जितनी तेजी से बढ़ा है, उतनी ही तेजी से पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हुए हैं। आज हालात ऐसे बन गए हैं कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी शैक्षिक योग्यता या प्रशिक्षण के खुद को “पत्रकार” घोषित कर रहा है और सोशल मीडिया के जरिए खबरें प्रसारित कर जनमानस को प्रभावित कर रहा है।
इसी गंभीर मुद्दे को उठाते हुए जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया (रजि.) ने पत्रकारिता में न्यूनतम शैक्षिक योग्यता अनिवार्य करने की मांग तेज कर दी है।
हाल ही में चलाए जा रहे जागरूकता अभियान में संगठन ने स्पष्ट कहा है—
“अब पत्रकारिता के लिए भी शैक्षिक योग्यता तय होनी चाहिए।”
क्यों जरूरी है शैक्षिक योग्यता?
पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। इसकी नींव सत्य, निष्पक्षता और नैतिकता पर टिकी होती है।
बिना प्रशिक्षण के पत्रकारिता में आने के दुष्परिणाम:
- तथ्य जांच (Fact-checking) में कमी
- संवेदनशील मुद्दों पर असंतुलित रिपोर्टिंग
- फेक न्यूज और सनसनीखेज खबरों का प्रसार
- पेड न्यूज की प्रवृत्ति में वृद्धि
- जनता में भ्रम और लोकतंत्र पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि बिना प्रशिक्षित पत्रकार लोकतंत्र को कमजोर कर सकते हैं।
दुनिया में क्या है व्यवस्था?
कई विकसित देशों में पत्रकारिता के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता तय है, जैसे:
- पत्रकारिता या मास कम्युनिकेशन में डिग्री
- प्रोफेशनल ट्रेनिंग और प्रमाणन
भारत में भी अब ऐसी व्यवस्था लागू करने की मांग जोर पकड़ रही है।
जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया का प्रस्ताव
संगठन का स्पष्ट दृष्टिकोण है:
“योग्य पत्रकार — सशक्त लोकतंत्र”
प्रमुख मांगें:
- राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारों का पंजीकरण सिस्टम
- न्यूनतम शैक्षिक योग्यता अनिवार्य
- प्रशिक्षित पत्रकारों को मान्यता और सुरक्षा
- फेक न्यूज फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई
मध्य प्रदेश में अभियान तेज
मध्य प्रदेश संयोजक हरिशंकर पाराशर के नेतृत्व में राज्य में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
👉 इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर सहित कई जिलों में कार्यक्रम
👉 युवा पत्रकारों के लिए प्रशिक्षण पर जोर
👉 असली पत्रकारों को पहचान और सुरक्षा देने की पहल
सबसे बड़ा सवाल
👉 क्या बिना योग्यता के पत्रकारिता की खुली छूट लोकतंत्र के लिए खतरा बन रही है?
👉 क्या अब समय आ गया है कि इस पेशे को भी नियमों के दायरे में लाया जाए?
अब विकल्प नहीं, आवश्यकता
पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है।
अगर यह स्तंभ कमजोर हुआ, तो लोकतंत्र की नींव भी डगमगा जाएगी।
👉 इसलिए शैक्षिक योग्यता तय करना अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है।