खेत को खाद चाहिए, सिस्टम को मोबाइल! आगर मालवा में ई-टोकन से किसान परेशान.
ई-टोकन की बाधाओं से जूझते आगर मालवा के किसान
Farmers need fertilizer, but the system demands a mobile phone! E-token system leaves Agar Malwa farmers distressed.
Special Correspondent, Richa Tiwari, Agar Malwa, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, आगर मालवा। सरकार ने दावा किया था कि ई-टोकन व्यवस्था से खाद वितरण आसान होगा, लेकिन आगर मालवा जिले में यह व्यवस्था किसानों के लिए राहत नहीं, बल्कि नई परेशानी बनकर सामने आई है। अब खाद लेने के लिए खेत नहीं, पहले मोबाइल और फार्मर आईडी चाहिए—और यही किसान की सबसे बड़ी मुश्किल बन गई है।
डिजिटल सिस्टम, लेकिन किसान अब भी एनालॉग
ग्रामीण अंचल के अधिकांश किसान न तो एंड्रॉइड मोबाइल से परिचित हैं और न ही जटिल ऑनलाइन प्रक्रिया से। नतीजा यह है कि खाद के लिए किसान ऑनलाइन सेंटरों और वितरण केंद्रों के बीच भटक रहे हैं, जबकि रबी फसल समय पर खाद की मांग कर रही है।
स्टॉक नहीं तो टोकन नहीं
ई-टोकन तभी बनता है जब स्टॉक हो—यह नियम किसानों के लिए दोहरी मार साबित हो रहा है। पहले ऑनलाइन आवेदन, फिर स्टॉक की जांच और अंत में निराशा। किसान बार-बार खर्च कर रहा है, लेकिन खाद नहीं मिल पा रही।
सोसायटी का फंदा और किसानों की मजबूरी
कई किसान सोसायटी के डिफॉल्टर हैं या पहले खाद ले चुके हैं। थोड़ी-सी खाद नगद खरीदने की उनकी जरूरत इस व्यवस्था में फंसकर रह जाती है। मजबूरी में किसान खुद को गैर-सदस्य बताने को मजबूर हो रहे हैं।
कागजों में प्रचार, जमीन पर भटकाव
चार प्रचार रथ, कंट्रोल रूम और सरकारी दावे—सब कुछ कागजों में ठीक है, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि किसान आज भी ई-टोकन के लिए दर-दर भटक रहा है।
सवाल यह है…
क्या डिजिटल व्यवस्था किसानों की सुविधा के लिए है या उनकी परीक्षा लेने के लिए?
अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो ई-टोकन व्यवस्था रबी फसल के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
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