वन्य प्राणियों की सुरक्षा पर सवाल, तस्करों और शिकारियों से बचाने, वन विभाग के पास नहीं हैं हथियार.
Forest departments are grappling with a severe shortage of weapons, leaving rangers vulnerable to poachers and traffickers. This lack of resources hampers efforts to protect wildlife and preserve natural habitats
Forest rangers face increasing challenges in protecting wildlife as a shortage of weapons leaves them vulnerable to poachers and traffickers
Questions raised on wildlife protection, Forest Department lacks weapons to protect from poachers and traffickers.
Special Correspondent, Katni, MP Samwad.
कटनी। मध्य प्रदेश में लगातार जंगली जानवरों के शिकार की खबरें सामने आ रही हैं। वन विभाग इस पर कार्रवाई कर तस्करों और शिकारियों को दबोच भी रहा है। लेकिन ढीमरखेड़ा में विधायक के सामने वन विभाग को मिलने वाली सुविधाओं में कमी उजागर हुई है।
जानकारी के मुताबिक दरअसल, शाहडार जंगलों के बीच वन विभाग ने मध्यप्रदेश इको टूरिज्म अनुभूति कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस दौरान बड़वारा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह ने स्कूली बच्चों को पेड़ों का महत्व बताते हुए जानकारी दी कि कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी के कारण लोगों की मौत हो गई थी। तब लोगों को पेड़ों की अहमियत का पता चला। सभी को मिलजुल कर पेड़ लगाने चाहिए और जंगल और वृक्षों की सुरक्षा करना चाहिए।
कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों ने विधायक से क्षेत्र के जंगलों में धड़ल्ले से हो रहे कब्जा, पेड़ों की कटाई और वन्य प्राणियों का शिकार से जुड़ा एक मुद्दा उठाया और सुरक्षा व्यवस्था करने वाले विभाग के पास हथियार और हथकड़ी न होने की समस्या से विधायक को अवगत कगया। जिस पर विधायक ने शासन स्तर पर जानकारी पहुंचा कर मामले में व्यवस्था बनाने का आश्वासन दिया। 13 जनवरी को दूसरे चरण के अनुभूति कार्यक्रम का आयोजन शाहडार में होना है।
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