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भाजपा पूर्व विधायक एवं जिला अध्यक्ष के बीच मंच पर एक दूसरे को सुनाई खरीखोटी

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पूर्व विधायक सीताराम आदिवासी और भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र जाट के बीच हुए असंसदीय वार्तालाप और विवाद का कारण विधानसभा चुनाव के बाद हुई शिकवे-शिकायत को माना जा रहा है।

श्योपुर। लोकसभा के लिए प्रत्याशी घोषित किए गए शिवमंगल सिंह तोमर द्वारा उद्बोधन में नाम ना लिए जाने से विजयपुर के पूर्व विधायक सीताराम आदिवासी खफा हो गए और वह इस कदर भड़के गए कि मंच सहित पूरे पंडाल में सन्नाटा छा गया।

इस सभा में पूर्व विधायक बृजराज सिंह चौहान, दुर्गालाल विजय, सुरेंद्र जाट सहित एक दर्जन से अधिक भाजपा नेताओं ने उद्बोधन दिए। मंच पर बैठे सीताराम का नाम उद्बोधन में भी नहीं लिया गया। हद तो तब हो गई जब भाजपा प्रत्याशी ने अपने संबोधन में सूची पढ़ते हुए सभी नेताओं के नाम लिए, लेकिन सीताराम का नाम लेना भूल गए।

विधानसभा चुनाव की खुन्नस निकली मंच पर

पूर्व विधायक सीताराम आदिवासी और भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र जाट के बीच हुए असंसदीय वार्तालाप और विवाद का कारण विधानसभा चुनाव के बाद हुई शिकवे-शिकायत को माना जा रहा है। ज्ञात हो कि सुरेंद्र जाट ने विजयपुर विधानसभा प्रत्याशी बाबूलाल मेवरा के कहने पर जिन लोगों की पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने की शिकायत भेजी हैं, उनमें पूर्व विधायक सीताराम आदिवासी का नाम भी शामिल है। सीताराम ऐसी शिकायत से खुन्नस खाए बैठे हैं।

पूर्व विधायक की नाराजगी भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह जाट को झेलनी पड़ी। जिनका नाम लेकर उन्होंने जाट के खिलाफ अभद्रता करते हुए उनके लिए असंसदीय भाषा का भी उपयोग कर डाला। सार्वजनिक मंच से इस तरह असंसदीय भाषा के उपयोग से मंच सहित पूरे पंडाल में सन्नाटा पसर गया। इसका एक वीडिया इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित हो रहा है।

विवाद उस समय हुआ जब मुरैना-श्योपुर लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी शिवमंगल सिंह तोमर के प्रचार करने श्योपुर पहुंचने से पहले कराहल मुख्यालय पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। इस दौरान ब्राह्मण धर्मशाला में एकसभा का आयोजन किया गया।

इसी से आपा खोए बैठे

पूर्व विधायक सीताराम ने शिवमंगल सिंह के भाषणों के बीच खड़े होकर आदिवासियों के अपमान की बात कहकर सन्नाटा पसरा दिया, यही नहीं उन्होंने मंच पर बैठे एक दर्जन उन आदिवासी सरपंचों को भी मंच से उतरने को बोल दिया, जिन्होंने सदस्य ली थी। हालांकि बाद में भाजपा प्रत्याशी शिव मंगल सिंह ने उन्हे शांत कराया, लेकिन इस विवाद के बाद कराहल में अब इस बात पर यह चर्चा हो रही है क्या बीजेपी इस तरह आपस में लड़झगड़ कर प्रत्याशी को जीता पाएगी।

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