cropped-mp-samwad-1.png

जंगल के संरक्षक को चाहिए संरक्षण.

0

The guardian of the jungle needs protection.

अंतरराष्ट्रीय जगुआर दिवस आज

डॉ. केशव पाण्डेय

दुनियाभर में जैव विविधता संरक्षण के लिये अनेक दिवस मनाने के साथ ही विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। एक महत्वपूर्ण प्रजाति, सतत् विकास और मध्य एवं दक्षिण अमेरिका की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक के रूप में अंतरराष्ट्रीय जगुआर दिवस मनाया जाता है। यह अमेरिका की सबसे बड़ी जंगली बिल्ली है। “गार्जियन ऑफ द जंगल“ कहे जाने वाले जगुआर की प्रजाति उसके संरक्षण और महत्व से जुड़ी एक खास रिपोर्ट।

देश और दुनिया में प्रति वर्ष 29 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय जगुआर दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य जगुआर के सामने दिनों-दिन बढ़ते खतरों को टालना है। साथ ही मेक्सिको से अर्जेंटीना तक इसके अस्तित्व को सुनिश्चित करने वाले महत्त्वपूर्ण संरक्षण प्रयासों के बारे में लोगों का जागरूक करना है। ताकि जंगल की इस खास प्रजाति का संरक्षण हो सके।
जगुआर दिवस का मनाना कई मायनों में महत्वपूर्ण है। संयुक्त राष्ट्र के सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के व्यापक प्रयासों का ही यह परिणाम है। इसके तहत जगुआर कॉरिडोर और उनके आवासों के संरक्षण की ज़रूरत पर ध्यान आकर्षित करने के लिये राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय साझीदारों के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय जगुआर दिवस संबंधित देशों की सामूहिक आवाज़ का प्रतिनिधित्त्व करता है।

इसके महत्व को ऐसे समझा जा सकता है कि मार्च 2018 में “जगुआर 2030 फोरम“ के लिए संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 14 रेंज देशों के प्रतिनिधि न्यूयॉर्क में एकत्रित हुए। इस फोरम के परिणामस्वरूप जगुआर 2030 स्टेटमेंट अस्तित्व में आया, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी जगुआर संरक्षण पहलों की एक विस्तृत श्रृंखला को रेखांकित किया।
ब्राजील सहित अनेक रेंज देश राष्ट्रीय जगुआर दिवस समारोह भी मना रहे हैं। जिसने जगुआर को जैव विविधता के प्रतीक के रूप में मान्यता दी है। सबसे खास बात यह है कि जगुआर दिवस मनाने की मांग करने वालों में वैश्विक जंगली बिल्ली संरक्षण संगठन, पैंथेरा के सह संस्थापक,पूर्व सीईओ व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एलन रैबिनोविट्ज़ शामिल थे।
जिस तरह भारत में टाइगर सहित चीतों व अन्य प्रजातियों के संरक्षण को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। ठीक उसी तरह दुनिया भर में विलुप्त होते जगुआर के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2023 में इसकी थीम “गार्जियन आफ द जंगल“ रखी गई है। मतलब जंगल का अभिभावक… ताकि लोगों को अधिक से अधिक जागरूक किया जा सके।

कुदरत ने इन्हें बड़ा खूबसूरत बनाया है। हालांकि चीता और जगुआर दोनों ही पैंथर हैं, जिनके बीच बहुत अंतर है। एक के शरीर पर रोसेट (गुलाब के फूल जैसा) पैटर्न होता है। लेकिन भारत में जगुआर नहीं पाया जाता है। भारत में मेलेनिस्टिक तेंदुओं को ब्लैक पेंथर कहा जाता है। अमेरिका में मेलानिस्टिक जगुआर को ब्लैक पैंथर कहा जाता है। भारत में चार प्रजातियां पाई जाती हैं। गिर शेर, टाइगर, भारतीय तेंदुआ और हिम तेंदुआ इसके अलावा क्लाउडेड तेंदुआ भी पाया जाता है। जगुआर और चीता 1940 के दशक में विलुप्त हो गए थे। हालांकि भारत सरकार ने देश में चीता के संरक्षण के लिए 2022 में विशेष प्रयास किए और मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में इनका नया घर बनाया गया है।
खासतौर पर जगुआर लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी मांसाहारी और एकमात्र बड़ी बिल्ली है, जो मेक्सिको से अर्जेंटीना तक 18 देशों में मौजूद है। इसका वैज्ञानिक नाम पैंथेरा ओंका है। यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी बिल्ली शिकारी और अमेज़ॅन वर्षावन की एक महत्वपूर्ण प्रजाति है।

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की खतरे वाली प्रजातियों की रेड लिस्ट में “ संकटग्रस्त प्रजाति” के रूप में जगुआर अल सल्वाडोर और उरुग्वे में विलुप्त है। शेष रेंज देशों में दबाव का सामना कर रहा है। वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन सूचीः परिशिष्ट आई में आते हैं। कारण स्पष्ट है कि जगुआर को अपने प्राकृतिक आवास रेंज में 50 प्रतिशत से अधिक संकट का सामना करना पड़ा है। जगुआर अच्छे तैराक होते हैं और यहाँ तक कि पनामा नहर में तैरने के लिये भी जाने जाते हैं।

जगुआर की पहचान इसकी पूरी शृंखला में एक प्रजाति के रूप में की गई है, जो प्रजातियों की आनुवंशिक विविधता के लिये इसके निवास स्थान के संबंध और संरक्षण को महत्त्वपूर्ण बनाती है। जगुआर की शक्ति का अदांजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह कछुए का कवच हो या मगरमच्छ की खाल दोनों का शिकार कर लेता है।
देश में इस दिन विभिन्न राष्ट्रीय प्राणी उद्यानों में इसे मनाने के साथ ही लोगों को इसके संरक्षण के बारे में जागरूक किया जाता है। ऐसे में आवश्यक है कि “जंगल के सरंक्षक को भी मिले मानव का संरक्षण“।

तभी इस दिन को मनाने की सार्थकता सिद्ध होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

All Rights Reserved for MP Samwad LLP | CoverNews by AF themes.