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करोड़पति आबकारी अधिकारी अलोक खरे पर लोकायुक्त 4 साल से नहीं कर पा रहा कार्रवाई.

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The Lokayukta has been unable to take action against the millionaire excise officer Alok Khare for the past four years.

Udit Narayan

सरकार से अभियोजन की लोकायुक्त ने मांगी अनुमति 4 साल पहले अधिकारी के आधा दर्जन के अधिक ठिकानों पर हुई थी छापेमारी, बंगले, फार्महाउस सहित मिली 100 करोड़ से अधिक संपत्ति
Four years ago, the Lokayukta sought permission from the government for prosecution. Raids were conducted at more than half a dozen locations associated with the officer, resulting in the discovery of properties worth over 100 crores, including bungalows, farmhouses, and more.

भोपाल। मध्य प्रदेश के आबकारी विभाग के अधिकारी आलोक खरे पर गाज गिर सकती है। 4 साल पहले लोकायुक्त के छापे के दौरान आय से अधिक संपत्ति की पुष्टि हुई थी। राज्य सरकार से लोकायुक्त ने अभियोजन की स्वीकृति मांगी की है। लोकायुक्त के पत्र के बाद वाणिज्य कर विभाग की प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी ने आलोक खरे की अभियोजन स्वीकृति देने के लिए आबकारी आयुक्त ओपी श्रीवास्तव को पत्र लिखा है। लोकायुक्त पुलिस ने 4 साल पहले सहायक आबकारी आयुक्त आलोक खरे के साथ ठिकानों पर छापेमारी की थी। भोपाल में दो इंदौर में दो और रायसेन में दो छतरपुर में एक साथ छापेमारी की गई।

लोकायुक्त ने कार्रवाई के दौरान पाया कि खरे ने आय से अधिक संपत्ति बनाई है। इसके बाद विभाग ने खरे को रीवा जिला आबकारी आयुक्त बनाकर भेज दिया। छापे के बाद जानकारी निकाली कि 100 करोड रुपए से अधिक की संपत्ति पाई गई है। इंदौर के पास इलाके में पेंट हाउस और बंगले का पता चला है। तीन किलो सोना मिलने की भी जानकारी थी। इंदौर में जिस फ्लैट में आलोक खरे रहते थे, उसे पर ताला था। लोकायुक्त टीम ने ताले को भी सील कर दिया था। भोपाल की चूना भट्टी और बाग मुगलिया में दो बड़े बंगले और कोलार में फार्म हाउस की जमीन से जुड़े हुए दस्तावेज मिले थे। इसके अलावा रायसेन में दो फार्म हाउस का भी खुलासा हुआ। खरे ने अपनी पत्नी के इनकम टैक्स रिटर्न में रायसेन में फलों की खेती से आय होना बताया था। फल दिल्ली में बेचे जाते थे, जिसकी वजह से करोड़ों रुपए की आय हुई। सूत्र बताते हैं कि दस्तावेज की जांच के बाद यह खुलासा हुआ कि ट्रकों से फल दिल्ली भेजने की बात कही गई लेकिन उन नंबरों की जांच करने के बाद आॅटो के नंबर निकाले।

फाइल बंद, फिर खुली
सूत्र बताते हैं कि लोकायुक्त ने डीजी ने आलोक खरे के खिलाफ चल रही फाइल को बंद कर दिया था। इस मामले में लोकायुक्त के चेयरमैन के दखल के बाद हटाए डीजी के खिलाफ सरकार को रिपोर्ट दे दी थी। फिर नए डीजी ने अलोक के मामले की फाइल खोल दी। इस मामले में पूर्व डीजी की कथित इमानदारी पर भी सवाल उठे थे। ईडी भी कर रही जांच- लोकायुक्त पुलिस के अलावा अलोक खरे के खिलाफ ईडी भी जांच कर रही है। इसके लिए बकायदा लोकायुक्त पुलिस के डीजी को पत्र लिखकर जांच की रिपोर्ट देने के लिए कहा था। माना जा रहा है कि ईडी मनी लाड्रिंग के मामले में कार्रवाई कर सकती है। हालांकि लोकायुक्त को अभियोजन की स्वीकृति का इंतजार है। हैरत की बात है कि खरे को सरकार ने छापेमारी के बाद निलंबित नहीं किया। इसके अलावा उन्हें सिर्फदूसरे जिले में पोस्टिंग दे दी।

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