जीरो डिस्चार्ज’ या ज़हरीला डिस्चार्ज? एथेनॉल प्लांट पर स्पेंट वॉश के कथित खेल का आरोप.
Zero Discharge” or Toxic Discharge? Ethanol Plant Faces Allegations of Illegal Spent Wash Disposal.

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News
MP संवाद समाचार, कटनी/भोपाल। कटनी जिले के सलैया (देवरी हटाई) क्षेत्र में संचालित विनस एग्रो फ्यूल प्राइवेट लिमिटेड पर पर्यावरणीय नियमों के कथित उल्लंघन के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि रेड कैटेगरी (अत्यधिक प्रदूषणकारी) उद्योग की श्रेणी में आने वाली इस एथेनॉल इकाई से निकलने वाले स्पेंट वॉश (औद्योगिक अपशिष्ट) का खुले क्षेत्रों एवं सफेद मिट्टी की खदानों में अवैध रूप से निस्तारण किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे दुर्गंध, पर्यावरण प्रदूषण और कृषि भूमि व जल स्रोतों पर संभावित खतरा उत्पन्न हो रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ बनाम जमीनी हकीकत
एथेनॉल एवं डिस्टिलरी उद्योगों के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) प्रणाली लागू करना अनिवार्य माना जाता है, जिसके तहत तरल औद्योगिक अपशिष्ट को खुले वातावरण में छोड़ा नहीं जा सकता।
इसके बावजूद शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि—
- स्पेंट वॉश खुले क्षेत्रों और खदानों में डाला जा रहा है।
- बारिश के दौरान यह अपशिष्ट खेतों और जल स्रोतों तक पहुंचने का खतरा पैदा कर सकता है।
- आसपास के गांवों में दुर्गंध और प्रदूषण से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।
जनसुनवाई में शिकायत, निरीक्षण पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों ने 21 जुलाई 2026 को कटनी कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में शिकायत क्रमांक-80 दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ताओं में रविकांत राय, विजय कुमार राय, सूरज प्रसाद राय, राजाराम राम, राजेंद्र राम, प्रमोद राम और अवनीकांत राय सहित अन्य ग्रामीण शामिल हैं।
शिकायत में मांग की गई थी कि—
- राजस्व, कृषि और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम मौके का निरीक्षण करे।
- स्पेंट वॉश के नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराई जाए।
- यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो संबंधित कंपनी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
- खुले में अपशिष्ट निस्तारण पर तत्काल रोक लगाई जाए।
शिकायत के बाद प्रदूषण नियंत्रण विभाग और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। हालांकि, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह गया।
पंचनामे और वास्तविक स्थिति में अंतर का दावा
ग्रामीणों का दावा है कि मौके पर लगभग 50 ट्रॉली स्पेंट वॉश खुले क्षेत्र में डाला गया था, जबकि निरीक्षण पंचनामे में कथित रूप से केवल 10 से 20 ट्रॉली अपशिष्ट का उल्लेख किया गया।
शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि निरीक्षण के दौरान उन्हें मौके पर न तो बुलाया गया और न ही इसकी सूचना दी गई। उनका कहना है कि इससे जांच की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।
अब प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे।
फिलहाल पूरा मामला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की जांच पर निर्भर है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और यदि पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित प्राधिकरण क्या कार्रवाई करता है।
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