गरीबों के घर पर ‘रेट कार्ड’ का आरोप! PM आवास सर्वे में ₹3-5 हजार वसूली की शिकायत.
Rate Card’ Allegations for Poor Families’ Homes! Complaint of ₹3,000–₹5,000 Extortion During PM Housing Survey.

MP संवाद समाचार, कटनी/भोपाल। कटनी जिले के बहोरीबंद विकासखंड अंतर्गत ग्राम खिरहनी में प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वे को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। जिला कांग्रेस सेवादल के पूर्व अध्यक्ष पंकज गौतम ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सर्वे प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और ग्रामीणों से अवैध वसूली के आरोप लगाए हैं।
ज्ञापन में कृषि विस्तार अधिकारी जे.पी. दीवान पर आरोप लगाया गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वे के नाम पर ग्रामीणों से कथित रूप से ₹3,000 से ₹5,000 तक की राशि ली गई। साथ ही, शिकायत में दावा किया गया है कि योजना के वास्तविक पात्र परिवारों को सूची से बाहर कर कथित रूप से अपात्र लोगों के नाम लाभार्थी सूची में शामिल किए गए।
आरोप गंभीर हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य जरूरतमंद और पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि सर्वे और हितग्राही चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी या अवैध वसूली की पुष्टि होती है, तो यह सरकारी योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर सकती है।
₹3,000 से ₹5,000 की कथित वसूली—क्या गरीबों के हक पर लगा ‘रेट कार्ड’?
ज्ञापन के अनुसार, करीब तीन माह पहले ग्राम खिरहनी में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए सर्वे किया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सर्वे के दौरान कुछ ग्रामीणों से कथित तौर पर ₹3,000 से ₹5,000 तक की राशि की मांग या वसूली की गई।
यदि यह आरोप जांच में सही साबित होता है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि सरकारी योजना के लाभार्थी चयन के लिए ग्रामीणों से पैसा क्यों लिया गया और इस कथित वसूली के पीछे कौन जिम्मेदार था?
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई वास्तविक पात्र परिवारों के नाम लाभार्थी सूची से बाहर कर दिए गए, जबकि कथित रूप से अपात्र व्यक्तियों को सूची में शामिल किया गया।
अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराए और यह स्पष्ट करे कि प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची तैयार करने में नियमों का पालन हुआ या नहीं।
पात्र परिवार बाहर, अपात्र अंदर? नए सिरे से सर्वे की मांग
जिला कांग्रेस सेवादल ने कलेक्टर से मांग की है कि ग्राम खिरहनी में किए गए सर्वे की निष्पक्ष जांच कराई जाए और आवश्यकता होने पर सर्वे को निरस्त कर नए सिरे से प्रक्रिया पूरी की जाए।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि वास्तविक पात्र हितग्राहियों की पहचान कर उन्हें सूची में शामिल किया जाए तथा यदि किसी अपात्र व्यक्ति का नाम लाभार्थी सूची में शामिल पाया जाता है तो उसे नियमानुसार हटाया जाए।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रधानमंत्री आवास योजना में पात्रता सूची में छोटी-सी गड़बड़ी भी किसी जरूरतमंद परिवार को सरकारी सहायता से वंचित कर सकती है। ऐसे में प्रशासन को केवल कागजी जांच के बजाय जमीनी स्तर पर सत्यापन कर वास्तविक स्थिति सामने लानी चाहिए।
सेवानिवृत्ति से पहले आरोपों की आंच, अब प्रशासन की जांच पर नजर
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित कृषि विस्तार अधिकारी शीघ्र सेवानिवृत्त होने वाले हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उनके कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताएं हुईं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी का पक्ष भी सामने नहीं आया है। ऐसे में आरोपों की वास्तविकता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या कलेक्टर इस शिकायत की निष्पक्ष जांच कराकर कथित वसूली और लाभार्थी चयन की सच्चाई सामने लाएंगे?
यदि आरोप गलत हैं तो उनकी स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होना जरूरी है।
क्योंकि प्रधानमंत्री आवास योजना किसी राजनीतिक दल या अधिकारी की निजी कृपा नहीं, बल्कि पात्र गरीब परिवारों के लिए सरकारी अधिकार और कल्याणकारी योजना है। ऐसे में इस योजना के लाभार्थी चयन में पारदर्शिता और निष्पक्षता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।
अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या खिरहनी में फिर से निष्पक्ष सर्वे होगा और क्या कथित ‘वसूली’ की शिकायत की जांच किसी नतीजे तक पहुंचेगी?
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This report presents allegations from a submitted memorandum; claims remain unverified until investigated and established by competent authorities or courts.