बालाघाट की कस्टम मिलिंग पर घोटाले का शक, 15 दिन में जांच नहीं तो फिर हाईकोर्ट.
Suspicion of a Scam in Balaghat’s Custom Milling: Back to the High Court if No Investigation is Conducted Within 15 Days.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
एमपी संवाद समाचार, भोपाल/बालाघाट। National Crime Records Bureau नहीं, बल्कि अब खाद्यान्न आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े दस्तावेज़ों ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है—क्या बालाघाट जिले से बाहर भेजे गए धान और चावल की कस्टम मिलिंग प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है?
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने मध्य प्रदेश शासन, खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव और M.P. State Civil Supplies Corporation Limited के प्रबंध संचालक को लिखित शिकायत भेजकर वर्ष 2024-25 में बालाघाट जिले से बाहर कस्टम मिलिंग हेतु भेजे गए चावल की विस्तृत जांच की मांग की है।
RTI से मिले दस्तावेज़ों ने बढ़ाया संदेह
शिकायत के अनुसार, सूचना के अधिकार के तहत कई राइस मिलों और उनसे संबंधित परिवहन जानकारी मांगी गई थी। इनमें यह पूछा गया था कि:
- किन मिलों को धान/चावल का आवंटन किया गया?
- कितना स्टॉक भेजा गया?
- किस तारीख को परिवहन हुआ?
- ट्रक नंबर क्या थे?
- आर.ओ. नंबर क्या थे?
- माल किस स्थान पर भेजा गया?
- क्या वाहनों में GPS सिस्टम सक्रिय था?
मंच का आरोप है कि उपलब्ध कराई गई जानकारी में ट्रक नंबर तो दिए गए, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वाहनों में GPS सिस्टम लगा था या नहीं।
“ट्रक चले या कागज़?” सबसे बड़ा सवाल
डॉ. नाजपांडे ने पत्र में कहा है कि GPS संबंधी जानकारी न दिए जाने से पूरा मामला संदिग्ध हो गया है। यदि वाहनों की वास्तविक लोकेशन और आवाजाही का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो यह जांच का विषय है कि चावल वास्तव में निर्धारित स्थान तक पहुंचा या केवल दस्तावेज़ों में ही परिवहन दर्शाया गया।
जिन राइस मिलों के नाम आए सामने
शिकायत में आदिशक्ति राइस मिल, हितांशी फूड प्रोसेसर्स प्रा. लि., श्री राम राइस मिल सहित कई मिलों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें कस्टम मिलिंग से संबंधित कार्य आवंटित किए जाने की जानकारी मांगी गई थी।
15 दिन में जांच नहीं तो हाईकोर्ट की चेतावनी
मंच ने स्पष्ट किया है कि इसी मुद्दे पर Madhya Pradesh High Court में जनहित याचिका पहले से लंबित है। यदि 15 दिनों के भीतर विस्तृत जांच शुरू नहीं की गई, तो संस्था पुनः हाईकोर्ट की शरण लेगी।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर उठे गंभीर प्रश्न
बालाघाट जैसे धान उत्पादक जिले से जुड़े इस मामले ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। यदि GPS निगरानी और परिवहन सत्यापन में कमी पाई जाती है, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि खाद्यान्न प्रबंधन में संभावित बड़े घोटाले का संकेत हो सकता है। जब की मध्यप्रदेश शासन ने आदेशित किया है कि धान ओर चावल के परिवहन में GPS लगे हुए ट्रकों का ही इस्तेमाल किया जाए.
सवाल जो जवाब मांगते हैं
- क्या चावल वास्तव में जिले से बाहर भेजा गया?
- क्या सभी वाहनों में GPS सिस्टम सक्रिय था?
- GPS डेटा उपलब्ध है या नहीं?
- परिवहन और प्राप्ति का स्वतंत्र सत्यापन हुआ?
- जिम्मेदार अधिकारियों ने निगरानी क्यों नहीं की?
एमपी संवाद की नजर इस मामले पर बनी रहेगी
यह मामला केवल कागज़ी प्रक्रिया का नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के खाद्यान्न प्रबंधन और सार्वजनिक धन की जवाबदेही से जुड़ा है। यदि जांच होती है, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। एमपी संवाद इस मुद्दे की हर परत पर नजर बनाए हुए है।