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सीमा से ज्यादा नसबंदी, निगरानी शून्य — स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही बेनकाब.

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Excess Sterilizations Beyond the Prescribed Limit, Zero Monitoring — Health Department’s Negligence Exposed.

Special Correspondent, Dhar, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, धार जिले के बाग में आयोजित परिवार कल्याण नसबंदी शिविर में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर कटघरे में आ गई है।
शिविर में तय मानकों से अधिक महिलाओं की नसबंदी किए जाने और प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं की शिकायत मिलते ही विभाग ने औपचारिक कार्रवाई शुरू करने का दावा किया है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनीता सिंगारे ने बताया कि शिविर में निर्धारित संख्या से अधिक नसबंदी किए जाने तथा प्रोटोकॉल का पालन न होने की जानकारी संज्ञान में आते ही जांच और विभागीय कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई।

सीएमएचओ के अनुसार बाग विकासखंड के बीएमओ डॉ. विरभद्र सिंह मुवेल को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है और उन्हें प्रशासनिक दृष्टि से धार मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है।

डॉ. सिंगारे ने यह भी स्पष्ट किया कि बीएमओ को निलंबित करने का अधिकार उनके स्तर पर नहीं है, इसलिए इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई की अनुशंसा भेजी गई है।

कागजी कार्रवाई या जिम्मेदारी से बचने की कोशिश?

गौरतलब है कि नसबंदी शिविर में निर्धारित सीमा से कहीं अधिक महिलाओं की सर्जरी किए जाने की बात सामने आने के बाद पूरे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
परिवार नियोजन जैसे संवेदनशील कार्यक्रम में इस तरह की जल्दबाजी और लापरवाही सीधे महिलाओं के स्वास्थ्य और जान से खिलवाड़ मानी जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि—

  • जब तय मानक और लक्ष्य पहले से निर्धारित होते हैं,
  • तो फिर मौके पर इतनी अधिक संख्या में नसबंदी कैसे कर दी गई?
  • और स्थानीय स्तर पर निगरानी करने वाले अधिकारी आखिर क्या कर रहे थे?

सिर्फ आश्वासन, जवाबदेही अब भी गायब

स्वास्थ्य विभाग ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन जरूर दिया है, लेकिन अब तक की कार्रवाई केवल नोटिस और अटैचमेंट तक सीमित है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रशासनिक लापरवाही पर असली कार्रवाई से पहले फाइलों की लंबी प्रक्रिया ही सबसे मजबूत ढाल बन जाती है।

अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या यह मामला भी पहले की तरह कागजी जांच में दबा दिया जाएगा, या फिर वास्तव में जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस और उदाहरणात्मक कार्रवाई होगी।

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