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निजीकरण और श्रम कोड के खिलाफ सड़कों पर मजदूर, कटनी फैक्ट्री में प्रदर्शन.

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Workers take to the streets against privatisation and labour codes, protest at Katni factory.

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Katni, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, कटनी। चार नए श्रम कोड, निजीकरण, आउटसोर्सिंग और पेंशन व्यवस्था में बदलाव के खिलाफ देशभर में उठी मजदूरों की आवाज़ गुरुवार को कटनी की आयुध निर्माणी तक साफ सुनाई दी।
केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर हुए भारत बंद के दौरान आयुध निर्माणी कटनी में सैकड़ों कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर सरकार को सीधी चेतावनी दी।

यूनियनों का दावा है कि इस देशव्यापी हड़ताल में करीब 30 करोड़ मजदूर शामिल हुए। बैंक, परिवहन और बिजली जैसी सेवाओं पर भी इसका व्यापक असर देखा गया।

▶ श्रम कोड से लेकर पेंशन तक — हर मोर्चे पर नाराज़गी

कटनी में प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि नए श्रम कोड मजदूरों के अधिकार कमजोर करते हैं, जबकि निजीकरण और निगमीकरण से स्थायी नौकरियों पर सीधा खतरा पैदा हो रहा है।
एनपीएस के स्थान पर यूपीएस की बहाली, अनुकंपा नियुक्ति, बिजली संशोधन विधेयक-2025 और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को भी मजदूर-किसान विरोधी बताया गया।

▶ काले बैज, नारे और लंच बॉयकॉट

ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉई फेडरेशन और इंटक से संबद्ध संगठनों के आह्वान पर कर्मचारियों ने काले बैज लगाकर पूरे दिन काम किया और दोपहर में एक घंटे का लंच बॉयकॉट कर सरकार के खिलाफ नाराज़गी जाहिर की।

एचएमएस समर्थित यूनियन, आफ कर्मचारी यूनियन (इंटक) और लेबर यूनियन के संयुक्त प्रयास से प्रदर्शन को व्यापक समर्थन मिला।

▶ यूनियनों में फूट, आंदोलन की बड़ी कमजोरी

हालांकि, बीएमएस समर्थित यूनियन के आंदोलन से अलग रहने और प्रदर्शन के खिलाफ पत्र लिखने से कर्मचारियों के बीच भ्रम की स्थिति बनी रही।
यही वह बिंदु है, जहां मजदूर आंदोलन की सबसे बड़ी कमजोरी सामने आती है —
नाराज़गी तो है, लेकिन एकजुट मोर्चा अब भी अधूरा है।

▶ जुलाई 2025 की हड़ताल की याद

कटनी के कर्मचारियों ने यह भी याद दिलाया कि जुलाई 2025 में हुए देशव्यापी आंदोलन में भी आयुध निर्माणी के कर्मचारियों ने स्वेच्छा से काम रोककर विरोध जताया था।
इस बार भी आक्रोश साफ दिखा, लेकिन संगठनात्मक मतभेदों ने आंदोलन की धार को कमजोर किया।

▶ सवाल साफ है — मजदूरों की सुनेगी सरकार?

कटनी से उठी यह आवाज़ सिर्फ एक फैक्ट्री तक सीमित नहीं है।
यह उस असंतोष का प्रतीक है, जो देशभर के श्रमिक वर्ग में पनप रहा है।

अगर सरकार श्रम सुधार के नाम पर केवल कॉर्पोरेट सुविधा को प्राथमिकता देती रही और मजदूरों की सुरक्षा, पेंशन और रोजगार की गारंटी पर चुप्पी बनाए रखी, तो आने वाले दिनों में ऐसे आंदोलन और तेज़ होंगे।

कटनी की आयुध निर्माणी से उठा यह संदेश साफ है —
मजदूर अब सिर्फ सहने के मूड में नहीं हैं, सवाल पूछने सड़क पर उतर चुके हैं।

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